मुंबई , अक्टूबर 15 -- महाराष्ट्र में पालघर जिले के विक्रमगढ़ और जव्हार तालुकों के चार आवासीय विद्यालयों में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए स्नेह आशा फाउंडेशन ने 12 सप्ताह का जीवन कौशल कार्यक्रम शुरू किया है।

'जीवन कौशल्य' नाम के इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वित्तीय साक्षरता, अंग्रेजी में संवाद, डिजिटल शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में कौशल विकसित करने में मदद करना है।

इस पहल के तहत छात्राओं को विद्यालय आने-जाने और अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद के लिए 55 साइकिलें भी वितरित की गईं। कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध आदिवासी लोक कलाकार भिकल्या लडक्या धिंडा बाबा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने आदिवासी समुदाय के बच्चों को सशक्त बनाने में शिक्षा और उचित मार्गदर्शन के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "आदिवासी समुदायों के बच्चों में अपार क्षमता है। सही शिक्षा, मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर वे अपना भविष्य संवार सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं। इसके लिए उन्हें उचित सहयोग की जरूरत है।"पालघर के आदिवासी क्षेत्रों में दूरियां अक्सर पढ़ाई जारी रखने, कौशल विकसित करने और भविष्य के लक्ष्यों को हासिल करने में बाधा बन जाती हैं। इस पहल का उद्देश्य छात्राओं के लिए आवागमन आसान बनाकर उन्हें अधिक स्वतंत्रता के साथ स्कूलों, कॉलेजों, प्रशिक्षण केंद्रों और भविष्य में रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में मदद करना है।

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