बारां , मई 29 -- राजस्थान में बारां नगर परिषद में पिछले करीब ढाई वर्षों से स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने का असर अब परिषद की आर्थिक स्थिति और शहर के विकास कार्यों पर साफ दिखाई देने लगा है।

प्रशासनिक नेतृत्व के अभाव में परिषद की राजस्व व्यवस्था कमजोर पड़ती जा रही है, जिससे करोड़ों रुपये की संभावित आय प्रभावित हो रही है और कई महत्वपूर्ण विकास कार्य अटक गये हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर परिषद में लंबे समय से कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे प्रशासन चल रहा है। स्थायी आयुक्त नहीं होने के कारण राजस्व वसूली, निर्माण अनुमति, लीज नवीनीकरण, दुकानों का किराया संग्रह, विज्ञापन शुल्क, गृह कर और अन्य आय स्रोतों की नियमित निगरानी नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर परिषद की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।

सूत्रों ने बताया कि कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबे समय से लंबित पड़ी हैं, जिससे परिषद को मिलने वाला राजस्व समय पर जमा नहीं हो पा रहा। वहीं अवैध निर्माण, बकाया कर वसूली और अतिक्रमण जैसे मामलों में भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से नगर परिषद को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

नगर परिषद की आय प्रभावित होने का असर शहर के विकास कार्यों पर भी दिखाई दे रहा है। सड़क निर्माण, नालियों की मरम्मत, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई कार्य बजट और प्रशासनिक स्वीकृतियों के अभाव में धीमी गति से चल रहे हैं।

व्यापारियों और आम नागरिकों का आरोप है कि प्रशासनिक अस्थिरता के कारण नगर परिषद की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, जिसका खामियाजा सीधे आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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