बैतूल , अगस्त 05 -- मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले एवं आदिवासी बहुल बैतूल में कई महत्वपूर्ण शासकीय विभाग लंबे समय से प्रभारी अधिकारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। जिला पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई), जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय तथा नगर परिषदों सहित कई विभागों में नियमित अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने से प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है।
जानकारों के अनुसार जिले में विभिन्न विभागों के नियमित पद वर्षों से रिक्त हैं और उनका संचालन अतिरिक्त प्रभार के माध्यम से किया जा रहा है। शासन परिवर्तन के बाद भी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
हाल ही में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री मनोज बैस के तबादले के बाद विभाग को नियमित अधिकारी नहीं मिल सका। उनके स्थान पर आमला के एसडीओ को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वर्षाकाल में पेयजल व्यवस्था और विभागीय योजनाओं के संचालन के मद्देनजर नियमित अधिकारी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इसी प्रकार जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय भी प्रभारी अधिकारी के माध्यम से संचालित हो रहा है। आमला और शाहपुर नगर परिषदों में नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) पदस्थ नहीं हैं। लोक निर्माण विभाग और पीआईयू में भी एसडीओ तथा उपयंत्रियों की कमी के कारण कई अधिकारियों को अतिरिक्त दायित्व सौंपे गए हैं।
जिले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का पद भी लगभग तीन माह से नियमित अधिकारी के बिना संचालित हो रहा है। पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रद्युत भारती के स्थानांतरण के बाद प्रारंभ में एसडीओ को प्रभार दिया गया था। बाद में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कलेक्टर बेन्दा जाट को जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया गया।
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि जिला पंचायत ग्रामीण विकास योजनाओं के संचालन का प्रमुख केंद्र है और नियमित अधिकारी के अभाव में कई प्रशासनिक तथा विकास संबंधी निर्णय प्रभावित हो रहे हैं। सरपंचों और सचिवों ने भी जिला पंचायत में शीघ्र नियमित मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति की आवश्यकता जताई है।
प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा है कि जिले के कई विभाग लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के सहारे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में नियमित अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने से शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
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