नयी दिल्ली , मई 22 -- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि वैश्विक पर्यावरणीय परिणाम तभी संभव हैं जब स्थानीय स्तर पर समुदायों को सशक्त बनाकर जैव विविधता संरक्षण को आगे बढ़ाया जाए। ।

श्री यादव ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर शु्क्रवार को भोपाल में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) में आयोजित राष्ट्रीय समारोह एवं चीता संरक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया के सबसे अधिक जैव विविधता वाले देशों में शामिल है, जहां हिमालय, वन, आर्द्रभूमि, घास के मैदान, रेगिस्तान और समुद्री तंत्र जैसे विविध पारिस्थितिक तंत्र पाए जाते हैं। इस दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि पवित्र उपवनों और पारंपरिक संरक्षण की सामुदायिक व्यवस्थाएं जैसी स्थानीय प्रथाएं भारत की समृद्ध पारिस्थितिक परंपरा को दर्शाती हैं। उनका कहना था कि जैव विविधता सम्मेलन और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हैं। उन्होंने कहा कि संरक्षण की सोच अब एकल प्रजातियों से आगे बढ़कर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा पर केंद्रित हो चुकी है और भारत सरकार द्वारा जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर मजबूत संस्थागत ढांचा विकसित किया गया है।

श्री यादव ने कहा कि पहुंच और लाभ-साझेदारी व्यवस्था के तहत लगभग 145 करोड़ रुपये लाभार्थियों को जारी किए जा चुके हैं, जिससे करीब 11,000 जैव विविधता प्रबंधन समितियों को लाभ मिला है। हालिया सुधारों से उद्योगों के लिए अनुपालन आसान हुआ है और स्थानीय समुदायों को उचित लाभ मिल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2022 में शुरू की गई चीता परियोजना भारत में पारिस्थितिकी बहाली और घास के मैदानों के पुनरुद्धार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जिसने वन्यजीव संरक्षण में नए आयाम स्थापित किए हैं।

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