चंडीगढ़ , अक्टूबर 08 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक अश्वनी शर्मा ने कहा है कि पटियाला और मोगा जिलों के 50 नगर निगम/ नगर परिषद वार्डों में चुनाव रद्द कर नये सिरे से मतदान कराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

श्री शर्मा ने गुरुवार को यहां जारी बयान में कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित तथ्य-जांच समिति की रिपोर्ट में नामांकन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, नामांकन पत्र छीनने, फाड़ने या नष्ट करने तथा उम्मीदवारों को धमकाने जैसी गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।उन्होंने कहा कि समिति ने पटियाला के 28 वार्डों तथा मोगा जिले के बाघापुराना के सभी 15 और धर्मकोट के सात वार्डों में चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताएं पाईं। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने इन वार्डों में छह सप्ताह के भीतर नए चुनाव कराने के निर्देश दिये।

श्री शर्मा ने आरोप लगाया कि आप सरकार ने विपक्षी उम्मीदवारों की आवाज दबाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर और निष्पक्ष माहौल उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

भाजपा नेता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति गठित करना और नामांकन से मतदान तक पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने का निर्देश देना चुनाव प्रक्रिया की निगरानी की आवश्यकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनावों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेगी।

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