पुणे , जुलाई 23 -- स्त्री आधार केंद्र महिलाओं को उनके कानूनी अधिकार समझाने, अन्याय के खिलाफ लड़ने और मुफ्त कानूनी मदद योजनाओं का लाभ उठाने में मदद करने के लिए 16 महत्वपूर्ण कानूनों पर एक व्यापक जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नीलम गोरे ने बताया कि उनकी अध्यक्षता में संगठन की एक बैठक आयोजित की गयी, जिसमें समान नागरिक संहिता पर एक संगोष्ठी आयोजित करने और सामुदायिक स्तर पर महिलाओं के लिए कानूनी जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर चर्चा की गयी।
इस प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए), घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण कानून, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न रोकथाम कानून, दहेज प्रतिषेध कानून, बाल विवाह निषेध कानून, मातृत्व लाभ, समान वेतन, पीसीपीएनडीटी, गर्भ का चिकित्सीय समापन कानून, पॉक्सो, अनैतिक व्यापार (निवारण) कानून, मुफ्त कानूनी सेवाएं, महिलाओं के विरासत व संपत्ति के अधिकार, साथ ही साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल किया जायेगा।
डॉ. गोरे ने महिलाओं को संबोधित करते हुये कृषि भूमि और संपत्ति से जुड़े मामलों में उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कई महिलाओं को अपने कानूनी अधिकारों का दावा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है क्योंकि कृषि भूमि या मकान के मालिक के रूप में उनका नाम दर्ज नहीं होता है।
उन्होंने महिलाओं से शादी के बाद अपने कानूनी अधिकारों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया और विवाह पंजीकरण कराने, जरूरी दस्तावेजों को संभालकर रखने तथा संपत्ति के मालिकाना हक वाले कागजातों में अपना नाम सही तरीके से दर्ज कराने पर जोर दिया।
डॉ. गोरे ने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, मानव तस्करी या बंधुआ मजदूरी के पीड़ितों, औद्योगिक हादसों के पीड़ितों और उन नागरिकों को मुफ्त कानूनी मदद उपलब्ध है जिनकी सालाना आय सरकार द्वारा तय सीमा से कम है।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में इस योजना का लाभ उठाने के लिए सालाना आय की सीमा तीन लाख रुपये है। इसके साथ ही उन्होंने आगे जोड़ा कि आवेदकों को अपनी शिकायत के लिखित बयान के साथ पहचान पत्र, फोटो, आय प्रमाण पत्र और जहां लागू हो, जाति व दिव्यांगता प्रमाण पत्र जमा करना जरूरी है।बैठक में स्त्री आधार केंद्र के जरिये एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का फैसला लिया गया, ताकि महिलाओं को कानून की जानकारी, मुफ्त कानूनी मदद की सूचना और उनके अधिकारों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया जा सके।
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