नयी दिल्ली , जनवरी 20 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने टिकाऊ सड़क निर्माण के लिए, विशेष रूप से दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में, स्टील स्लैग आधारित प्रौद्योगिकी के उपयोग की सिफारिश की है।

श्री सिंह ने प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और विशाखापत्तनम स्थित उद्योग भागीदार "रामुका ग्लोबल इको वर्क प्राइवेट लिमिटेड" के बीच गड्ढों की मरम्मत के लिए तैयार मिश्रण "ईकोफिक्स" के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में कहा कि राज्य एजेंसियों को इस प्रौद्योगिकी से परिचित कराने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। स्टील स्लैग तकनीक पर दो दिवसीय कार्यशाला अगले सप्ताह जम्मू-कश्मीर में आयोजित की जाएगी, जिसके बाद अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इसका आयोजन होगा। इसका उद्देश्य सड़क निर्माण विभागों के इंजीनियरों और अधिकारियों को इसके उपयोग और लाभों के बारे में जागरूक करना है।

उन्होंने कहा कि कई हिमालयी और पहाड़ी राज्यों को इस तकनीक से सबसे अधिक लाभ हो सकता है क्योंकि वहां कार्य अवधि कम होती है और भारी बारिश होती है जिससे सड़कें अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि लगभग दो साल पहले परीक्षण शुरू हुए थे, जिसकी शुरुआत गुजरात के सूरत और अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में पायलट परियोजनाओं से हुई थी। तब से, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, असम, गुजरात, झारखंड और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में स्टील स्लैग आधारित सड़क मरम्मत समाधानों का अलग-अलग स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने बताया कि कई संभावित उपयोगकर्ता, जिनमें कुछ राज्यों के वरिष्ठ इंजीनियर भी शामिल हैं, अभी भी इसकी उपलब्धता से अनजान हैं।

उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अनुसंधान का प्रत्यक्ष जनहित दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इकोफिक्स जैसे नवाचार यह दर्शाते हैं कि कैसे विज्ञान प्रयोगशालाओं से रोजमर्रा की जिंदगी में प्रवेश कर सकता है। उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के बदलते स्वरूप पर भी प्रकाश डाला और बताया कि इस परियोजना में निजी भागीदार का निवेश सरकारी सहायता के बराबर था, जो अधिक संतुलित सहयोग की ओर एक बदलाव का संकेत है।

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