चंडीगढ़ , अक्टूबर 12 -- पंजाब सरकार के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने सोमवार को केंद्र सरकार से स्टारलिंक समेत सभी लाइसेंसधारक उपग्रह ब्रॉडबैंड कंपनियों की मंजूरी प्रक्रिया निश्चित समयसीमा में पूरी करने की मांगकी है।

उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को नीतिगत दस्तावेज सौंपकर सभी संबंधित विभागों को समान शर्तों पर और भारतीय नियमों के तहत मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज करने का सुझाव दिया है।

'स्टारलिंक एंड इंडिया: ए पॉलिसी फ्रेमवर्क' शीर्षक वाले इस दस्तावेज में श्री सिद्धू ने सुझाव दिया है कि विभिन्न विभागों की लंबित मंजूरियों और सुरक्षा संबंधी आकलन को समानांतर रूप से पूरा करने के लिए सचिवों की समिति गठित की जाये। इसके तहत स्टारलिंक, यूटेलस वनवेब और जियो-एसईएस के मामलों का निपटारा 90 दिन जैसी घोषित समयसीमा में करने की सिफारिश की गयी है।

श्री सिद्धू के अनुसार, भारत के सामने विकल्प स्टारलिंक को अनुमति देने या रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारतीय शर्तों के तहत मंजूरी देने और अनिश्चितकाल तक निर्णय लंबित रखने के बीच है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट और लागू की जा सकने वाली शर्तों के साथ सभी कंपनियों को समान अवसर देना चाहिए।

दस्तावेज में दूरसंचार विभाग की मई 2025 की सुरक्षा शर्तों को न्यूनतम आधार मानते हुए अतिरिक्त प्रावधानों का सुझाव दिया गया है। इनमें भारतीय क्षेत्र में सरकार के निर्देशों को सर्वोपरि रखने का प्रावधान, भू-सीमा आधारित सेवा नियंत्रण प्रणाली (जियो-फेंसिंग) का स्वतंत्र भारतीय परीक्षण, भारत में सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति और बिना पूर्व अनुमति सेवा बंद करने के विरुद्ध गारंटी शामिल हैं।

श्री सिद्धू ने विदेशी निवेश को सरकारी मंजूरी मार्ग से अनुमति देने का सुझाव दिया है। इसके साथ भारत में परिचालन इकाई स्थापित करने, निर्धारित समयसीमा में उपयोगकर्ता टर्मिनलों का स्थानीय विनिर्माण शुरू करने और दूरदराज के आकांक्षी एवं सीमावर्ती जिलों में स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा पंचायत कार्यालयों को इंटरनेट से जोड़ने की जिम्मेदारी देने की सिफारिश की गई है। उन्होंने रक्षा और महत्वपूर्ण सरकारी संचार व्यवस्था को किसी एक विदेशी उपग्रह नेटवर्क पर निर्भर नहीं रखने तथा देश की अपनी निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) उपग्रह क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया है। व्यावसायिक सेवा शुरू होने से पहले राष्ट्रीय और राज्य आपदा मोचन बलों तथा जिला प्रशासन को सरकारी नियंत्रण वाले उपग्रह टर्मिनल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

दस्तावेज के मुताबिक, मई 2026 तक देश के 11,256 गांवों में 4जी नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। श्री सिद्धू ने कहा कि हिमालयी और पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों, द्वीपों, रेगिस्तानी इलाकों तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में उपग्रह ब्रॉडबैंड उपयोगी साबित हो सकता है। बाढ़, चक्रवात और संघर्ष जैसी परिस्थितियों में भी यह संचार का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। उन्होंने अमेजन की कुइपर सेवा को लाइसेंस मिलने के बाद उसके सहित सभी कंपनियों के लिए एक समान नियमावली, स्पेक्ट्रम मूल्य और समयसीमा तय करने का सुझाव दिया है। साथ ही, लंबित मंजूरियों की स्थिति सार्वजनिक करने और तीन साल बाद स्वतंत्र समीक्षा कराने की सिफारिश की है।

स्टारलिंक सहित उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाओं की मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के बीच समन्वय आवश्यक है। उन्होंने इन सभी प्राधिकरणों की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित