नयी दिल्ली , अगस्त 11 -- बाल भारती पब्लिक स्कूल के छात्रों ने धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध नाटक 'अंधा युग' का मंचन कर युद्ध के भयानक परिणामों और उसकी कभी न खत्म होने वाली मानवीय असर को बहुत प्रभावी ढंग से उजागर किया।

स्कूल के नाट्य शिक्षक डॉ. अंकुश शर्मा की परिकल्पित, लिखित और निर्देशित इस नाटक की कहानी महाभारत युद्ध के बाद के समय पर आधारित थी। इसमें कुरुक्षेत्र के प्राचीन युद्धक्षेत्र और आधुनिक दुनिया के संघर्षों के बीच समानताएं दिखायी गयी। दमदार अभिनय, प्रभावशाली संगीत और बेहतरीन मंच-सज्जा के माध्यम से नाटक में नफरत, बदले और हिंसा के बार-बार दोहराये जाने वाले चक्र को दिखाया गया, जिससे दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि 'आखिर जीता कौन?'नाटक ने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध की सबसे बड़ी त्रासदी न केवल शहरों का विनाश है बल्कि करुणा, अंतरात्मा और मानवता का धीरे-धीरे खत्म होना भी है। इस नाटक में कक्षा 6 से 12 तक के लगभग 80 छात्रों ने भाग लिया, जो प्रदर्शनकारी कला के माध्यम से रचनात्मकता, आत्मविश्वास, सहयोग और अनुभव-आधारित सीखने पर स्कूल के जोर को दर्शाता है।

कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित अतिथि शामिल हुए, जिनमें मुख्य अतिथि सुश्री पूजा हाली (आईआरएस) और विशिष्ट अतिथि श्री राजेश कुमार सिंह (प्रमुख, रिपर्टरी कंपनी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय) शामिल थे। इनके अलावा श्री निखिल चन्ना (अध्यक्ष, बाल शिक्षा समिति- सीएसई), श्री एलवी सहगल (संयुक्त सचिव, सीएसई), श्रीमती मीनू गोस्वामी (स्कूल की सचिव-प्रबंधक) और सम्मानित अतिथि सुश्री अनुपम सिंह और सुश्री काजल सूरी भी मौजूद थीं। समाजसेवी श्री सचिन तंवर, पूर्व पीजीटी अंग्रेजी शिक्षिका सुश्री राधा नायर, सीएसई, पीटीए और एलुमनाई एसोसिएशन के सदस्य, अभिभावक, शिक्षक और मेजबान व पड़ोसी स्कूलों के छात्र भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

सुश्री पूजा हाली ने युवा कलाकारों को बधाई देते हुए प्रदर्शनकारी कला को बढ़ावा देने के स्कूल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इसे बातचीत, अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया, जो छात्रों के सर्वांगीण विकास और भावनात्मक विकास में योगदान देता है।

श्री राजेश कुमार सिंह ने नाटक की कलात्मक उत्कृष्टता की सराहना की और थिएटर को एक 'सामूहिक कला रूप' बताया, जिसमें अनुभव-आधारित सीखने और जीवन के जरूरी कौशल को विकसित करने की काफी क्षमता है।

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