पंचकूला , अगस्त 11 -- भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित खाद्य और संतुलित आहार से संबंधित नियमों के तहत अतिरिक्त वसा, अतिरिक्त चीनी और सोडियम की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों की पहचान के लिए निश्चित सीमा तय करने का प्रस्ताव किया है।
भारत के असाधारण राजपत्र में 10 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप विनियमों के अनुसार, किसी ठोस खाद्य पदार्थ में प्रति 100 ग्राम 4.2 ग्राम से अधिक अतिरिक्त वसा होने पर उसे 'उच्च वसायुक्त' माना जाएगा। तरल खाद्य पदार्थों के मामले में प्रति 100 मिलीलीटर 1.5 ग्राम से अधिक अतिरिक्त वसा होने पर वह इस श्रेणी में आएगा।
चीनी के लिए भी अलग सीमा प्रस्तावित की गई है। किसी ठोस खाद्य पदार्थ में प्रति 100 ग्राम 3 ग्राम से अधिक अतिरिक्त चीनी होने पर उसे 'उच्च शर्करायुक्त' माना जाएगा। तरल खाद्य पदार्थ में प्रति 100 मिलीलीटर 2 ग्राम से अधिक अतिरिक्त चीनी होने पर वह उच्च शर्करा की श्रेणी में आएगा।
इसी तरह सोडियम के लिए ठोस खाद्य पदार्थों में प्रति 100 ग्राम 0.625 ग्राम से अधिक और तरल खाद्य पदार्थों में प्रति 100 मिलीलीटर 0.175 ग्राम से अधिक की सीमा प्रस्तावित की गई है। इससे अधिक मात्रा होने पर संबंधित खाद्य पदार्थ को 'उच्च सोडियमयुक्त' माना जाएगा।
प्रस्तावित प्रावधान में कहा गया है कि इन विनियमों के प्रयोजन के लिए अतिरिक्त वसा, अतिरिक्त चीनी या सोडियम की उच्च मात्रा वाले खाद्य उत्पादों को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी भारतीयों के लिए आहार संबंधी दिशानिर्देश-2024 के अनुसार विनियमित किया जाएगा।
ये प्रावधान खाद्य सुरक्षा और मानक (स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित खाद्य और संतुलित आहार) संशोधन विनियम, 2026 के प्रारूप का हिस्सा हैं।
एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा और मानक (स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित खाद्य और संतुलित आहार) विनियम, 2020 के विनियम 6 के बाद नया विनियम 7 जोड़ने का प्रस्ताव किया है।
अधिसूचना के अनुसार मूल विनियमों को भारत के राजपत्र में 4 सितंबर, 2020 को प्रकाशित किया गया था।
महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित सीमाएं अभी अंतिम नियम नहीं हैं। एफएसएसएआई की अधिसूचना 7 अगस्त, 2026 की है, जबकि इसे 10 अगस्त को भारत के असाधारण राजपत्र में प्रकाशित किया गया।
प्रभावित होने की संभावना वाले व्यक्तियों से इस प्रारूप पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। राजपत्र की प्रतियां जनता को उपलब्ध कराए जाने की तारीख से 60 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद प्रारूप विनियमों पर विचार किया जाएगा।
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