श्रीनगर , जून 23 -- कश्मीर के 'शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' (स्किम्स) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पहली बार परिवार से बाहर के एक अनजान व्यक्ति के स्टेम कोशिकाओं (रक्त बनाने वाली कोशिकाएं) का इस्तेमाल करके एक तीन साल के बच्चे की जान बचायी है। इस अनोखे इलाज से बच्चे को एक नई जिंदगी मिली है, जो 'इम्यूनिटी' की एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से पीड़ित था।
इस सफल ऑपरेशन की सबसे अनोखी बात यह रही कि बच्चे की जान बचाने के लिए स्टेम कोशिका दान करने वाला व्यक्ति भारत में नहीं, बल्कि सात समंदर पार पोलैंड देश में मिला। जब बच्चे के माता-पिता या परिवार के किसी भी सदस्य की कोशिका उससे नहीं मिली, तब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद से दुनिया भर में खोज शुरू की गयी और पोलैंड में एक सही दानकर्ता मिल गया।
अस्पताल के निदेशक प्रोफेसर एम. अशरफ गनी ने पत्रकारों को बताया कि यह कामयाबी जर्मनी की 'डीकेएमएस' संस्था के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की वजह से मिली है, जो दुनिया भर में ब्लड कैंसर और अन्य गंभीर मरीजों के लिए दानकर्ता ढूंढने का काम करती है।
श्री गनी ने बताया, "जब परिवार में कोई दानकर्ता नहीं मिलता, तो हम दुनिया भर में मरीज के खून से मेल खाने वाले व्यक्ति की तलाश करते हैं। पोलैंड में दानकर्ता मिलने के बाद वहां से स्टेम कोशिका को सुरक्षित तरीके से हवाई जहाज द्वारा कश्मीर के स्किम्स अस्पताल लाया गया और बच्चे के शरीर में डाल दिया गया।" उन्होंने बताया कि देश के गिने-चुने अस्पतालों में ही यह जटिल इलाज होता है। प्राइवेट अस्पतालों में इस इलाज का खर्च 30 से 40 लाख रुपये आता है, लेकिन स्किम्स अस्पताल ने इस बच्चे का पूरा इलाज लगभग मुफ्त में किया है, परिवार को सिर्फ कुछ जरूरी दवाओं का ही पैसा देना पड़ा।
अस्पताल के निदेशक ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस बड़ी कामयाबी के बाद डॉक्टरों ने आम जनता से अपील की है कि वे भी आगे आएं और स्टेम कोशिका दानकर्ता के रूप में अपना नाम दर्ज करवाएं, क्योंकि यह पूरी तरह सुरक्षित है और इससे किसी की जान बचाई जा सकती है।
अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि पोलैंड के इस मामले ने उन हजारों गंभीर मरीजों के लिए उम्मीद की नयी किरण जगा दी है, जिन्हें अपने परिवार में कोई दानकर्ता नहीं मिल पाता और जो खून या असाध्य बीमारियों से जूझ रहे हैं।
डॉक्टरों ने स्टेम कोशिका दान करने को लेकर लोगों के मन में बैठे डर और गलतफहमियों को भी दूर किया। उन्होंने बताया कि विज्ञान की प्रगति के कारण अब यह प्रक्रिया बहुत आसान और सुरक्षित हो गई है।
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