जालौन , मई 18 -- कभी जल संकट, सूखा और सीमित संसाधनों की चुनौतियों से जूझने वाला बुंदेलखंड का जालौन जिला आज सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार की सौर ऊर्जा नीति-2022 और जिला प्रशासन के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते जालौन हरित ऊर्जा के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में पिछले पांच वर्षों में जनपद में 300 मेगावाट से अधिक क्षमता की सोलर पार्क परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। इन परियोजनाओं में करीब 1500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जिससे जिले की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।
सरकार की नीति के तहत जनपद में 215 मेगावाट की सौर परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन दिया गया। 10 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली तीन प्रमुख परियोजनाओं को ट्रांसमिशन लाइन और सड़क जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे इनके संचालन में तेजी आई। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिले में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। इसके तहत नए विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि सौर ऊर्जा का सुचारु संचरण सुनिश्चित हो सके।
एक अभिनव पहल के तहत प्रशासन ने सरकारी और निजी किसानों के सहयोग से लगभग 23 हजार एकड़ भूमि बैंक तैयार किया है। इसमें बंजर और अनुपयोगी भूमि को चिन्हित कर सौर परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इस भूमि बैंक से करीब 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।
ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को देखते हुए कोल इंडिया लिमिटेड और एनएलसी इंडिया लि जैसी बड़ी कंपनियों को भी 2350 मेगावाट परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटित की गई है। इनके जरिए बड़े निवेश और आधुनिक तकनीक के आने की उम्मीद है।
इन परियोजनाओं से करीब 15 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है, जिससे हर साल लगभग 55 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।
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