श्रीगंगानगर , मार्च 26 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के सीमावर्ती अनूपगढ़ रेलवे स्टेशन पर बदहवास हालत में मिली किशोरी को गुरुवार को उसके घर भेज दिया गया है।

बाल कल्याण समिति(सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष जोगेंद्र कौशिक ने आज यह जानकारी देते बताया कि किशोरी उत्तराखंड के रुड़की (हरिद्वार) में अपनी मां के साथ रहती थी। उसके माता-पिता के बीच लंबे समय से आपसी विवाद चल रहा था, जिसके कारण उसको सौतेले पिता के साथ रहना पड़ रहा था। जहां उनके व्यवहार से तंग आकर वह बिना किसी को बताए घर से निकल गयी।

उन्होंने बताया कि किशोरी ने रुड़की रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ी और हरियाणा के डबवाली शहर पहुंच गई। वहां किसी अजनबी से मदद मांगकर वह अनूपगढ़ पहुंची, जो भारत का अंतिम रेलवे स्टेशन है। अनूपगढ़ से आगे कहीं और जाने के लिए ट्रेन पकड़ने की कोशिश में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने उसे बदहवास हालत में देख लिया। पुलिस ने तुरंत उसे अनूपगढ़ के वन स्टॉप सखी सेंटर में पहुंचाया।

वन स्टॉप सखी सेंटर अनूपगढ़ के दल ने किशोरी को श्रीगंगानगर स्थित बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। समिति ने उसे जिला मुख्यालय के वन स्टॉप सखी सेंटर में आश्रय दिया। कई दिनों तक लगातार काउंसलिंग के बाद बालिका ने अपनी घरेलू परेशानी, माता-पिता के विवाद और सौतेले पिता की डांट का पूरा ब्यौरा बताया। बाल कल्याण समिति ने बालिका की मां और भाई की तस्दीक की और हरिद्वार की बाल कल्याण समिति से संपर्क करके सामाजिक जांच रिपोर्ट (एसआईआर) भिजवाई। संबंधित थाने की पुलिस द्वारा उसके परिजनों की पुष्टि की गई। आज सुबह किशोरी को महिला पुलिस सुरक्षाकर्मी के साथ श्रीगंगानगर से ट्रेन द्वारा रुड़की भेज दिया गया।

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