हिसार , अक्टूबर 09 -- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने कहा है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल युवाओं में तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ाने के साथ उनके आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर रहा है। इसका असर उनकी पढ़ाई, कामकाज और सामाजिक संबंधों पर पड़ रहा है।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर हिसार के अग्रोहा स्थित महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज में 'सोशल मीडिया से होने वाले मनोवैज्ञानिक खतरे' विषय पर आयोजित कार्यशाला में डॉ. पुरोहित ने सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग और अवसाद के बीच संबंध पर चिंता जताई।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में विभिन्न शोध अध्ययनों के हवाले से बताया कि भारत में लगभग 49.1 करोड़ लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 95 प्रतिशत बच्चों के सोशल मीडिया के एकाउंट हैं और इनमें से 35 प्रतिशत प्रतिदिन पांच घंटे से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं।

डॉ. पुरोहित के अनुसार, 18 से 22 वर्ष आयु वर्ग के 40 प्रतिशत युवा अपनी भावनाएं और निजी बातें परिवार या दोस्तों से साझा करने के बजाय सोशल मीडिया पर व्यक्त करना पसंद करते हैं। इससे उनके आपसी संवाद और सामाजिक व्यवहार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया ने लोगों को आभासी रूप से जोड़ा है, लेकिन भावनात्मक दूरी भी बढ़ाई है। पारिवारिक संवाद में कमी, आर्थिक दबाव, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या मानसिक समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। सोशल मीडिया पर दूसरों की सफलता और जीवनशैली से तुलना करने तथा देर रात तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से भी मानसिक दबाव और नींद संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

डॉ. पुरोहित ने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बच्चों को पर्याप्त समय दें, उनसे खुलकर बातचीत करें और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने पर ध्यान दें।

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