बैतूल , अगस्त 27 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन की फसल पर अज्ञात बीमारी के प्रकोप से किसानों की चिंता बढ़ गई है। चिचोली तहसील के ग्राम जोगली सहित आसपास के क्षेत्रों में खेतों में खड़ी सोयाबीन की हरी-भरी फसल अचानक पीली पड़कर सूख रही है। किसानों का कहना है कि बीमारी तेजी से फैल रही है, जिससे फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका है।

फसल प्रभावित होने से चिंतित जोगली के किसानों ने मंगलवार को तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार श्याम सिंह उईके और कृषि विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने प्रभावित खेतों का तत्काल निरीक्षण और सर्वे कराने के साथ नुकसान का आकलन कर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा और फसल बीमा की राशि दिलाने की मांग की।

किसानों के अनुसार सोयाबीन के पौधे शुरुआत में सामान्य दिखाई देते हैं, लेकिन अचानक उनमें पीलापन आने के बाद वे कमजोर होकर सूखने लगते हैं। प्रभावित खेतों में पीले पौधों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसानों को आशंका है कि समय रहते बीमारी की पहचान और नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर उत्पादन पर पड़ सकता है।

ग्राम जोगली के किसान रामदयाल गंगारे, सुमन गंगारे, पूरनलाल मालवी, परसराम गावंडे, किसनू गंगारे, ललित गाड़गे, चंद्रप्रता गंगारे और बालाराम रावते ने बताया कि किसान पहले से खाद की उपलब्धता सहित कई कृषि संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सोयाबीन की फसल में बीमारी आने से उनकी चिंता और बढ़ गई है। किसानों ने कहा कि उन्होंने बीज, खाद, दवा और मजदूरी पर खर्च किया है और फसल खराब होने पर उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित गांवों में अधिकारियों की टीम भेजकर खेतों का मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने विशेषज्ञों से फसल की जांच कर बीमारी के कारणों का पता लगाने तथा आवश्यक उपचार के संबंध में किसानों को जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।

किसानों ने कहा कि सर्वे के माध्यम से वास्तविक नुकसान का आकलन कर शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार राहत और फसल बीमा का लाभ दिया जाए। उनका कहना है कि समय रहते बीमारी पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।

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