राजनांदगांव , जून 02 -- छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सोमनी में हाल ही में एक नाबालिग मरीज के उपचार के बाद चिकित्सकों एवं लैब तकनीशियन के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस पूछताछ के विरोध में डॉक्टरों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को ज्ञापन सौंपकर सुरक्षा तथा स्पष्ट राज्य स्तरीय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने की मांग की है।
चिकित्सकों ने आरोप लगाया कि मामले की पर्याप्त जांच और तथ्यात्मक परीक्षण के बिना मीडिया में प्रतिकूल खबरें प्रकाशित की गईं तथा संबंधित डॉक्टरों को अन्य संस्थानों में संलग्न कर कार्रवाई की आशंका उत्पन्न कर दी गई। उनका कहना है कि मामला जांचाधीन होने के बावजूद बिना विधिवत समन के डॉक्टरों को थाने में घंटों बैठाकर पूछताछ की गई, जिससे चिकित्सा कर्मियों में भय और असुरक्षा का माहौल बना है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सोमनी अस्पताल में स्वीकृत आठ डॉक्टरों के पदों के मुकाबले केवल दो महिला चिकित्सक कार्यरत हैं, जो बारी-बारी से 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं प्रदान कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद पोस्टमार्टम और मेडिको-लीगल मामलों जैसी जिम्मेदारियां भी उन्हीं पर हैं। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे हालात में प्रोत्साहन के बजाय सार्वजनिक प्रताड़ना से स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
डॉक्टरों ने राज्य सरकार से नाबालिग एवं अविवाहित महिला मरीजों की जांच, गर्भावस्था की पुष्टि के लिए मानक परीक्षण, गोपनीयता और पुलिस को सूचना देने की बाध्यता, प्रेग्नेंसी डायग्नोसिस के लिए अधिकृत चिकित्सक के निर्धारण, संदिग्ध गर्भपात के मामलों में कानूनी प्रक्रिया, मेडिको-लीगल प्रकरणों में पुलिस सूचना की जिम्मेदारी तथा उपचार एवं जांच संबंधी मानक प्रोटोकॉल सहित 10 बिंदुओं पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में कई संवेदनशील मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में चिकित्सकों को कानूनी और प्रशासनिक अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे चिकित्सीय निर्णय लेने में असहजता बढ़ रही है और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन पर असर पड़ने की आशंका है।
चिकित्सक संघ और स्थानीय डॉक्टरों ने मांग की है कि चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील मामलों में एकरूपता लाने के लिए राज्य स्तर पर व्यावहारिक एवं विधिसम्मत एसओपी शीघ्र जारी की जाए, जिससे डॉक्टर भयमुक्त वातावरण में अपनी सेवाएं दे सकें।
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