नयी दिल्ली , मई 13 -- सरकार ने सोने-चांदी के आयात पर शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है जिससे कम कैरेट के गहनों की बिक्री बढ़ने की संभावना है।

सोने-चांदी के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के लिए केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे घरेलू मांग हतोत्साहित होगी। विभिन्न श्रेणियों में सोने-चांदी के आयात पर मूल सीमा शुल्क में 10 प्रतिशत तक वृद्धि की गयी है। साथ ही पांच प्रतिशत कृषि उपकर भी लगाया गया है।

उद्योग जगत का कहना है कि यह कम कैरेट के सोने के गहनों को बढ़ावा देने का अवसर है। इससे सोने की खपत भी कम होगी और गहनों के ज्यादा बेहतर डिजाइन उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही उसने लोगों से घरों में पड़े पुराने गहनों के पुनर्चक्रण की भी अपील की है।

जानी-मानी ज्वेलरी डिजाइनर और उद्यमी हेतल वकील वालिया का कहना है कि आयात शुल्क में इस वृद्धि के बाद आभूषणो की खुदरा कीमतों में लगभग छह से आठ प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। सोने की कीमतें प्रति 10 ग्राम लगभग आठ हजार से 10 रुपये तक बढ़ सकती हैं, जबकि चांदी 15 हजार रुपये से 20 हजार रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हो सकती है।

इसके कारण आने वाली तिमाहियों में मांग कमजोर पड़ने की आशंका है। कुल मांग में 10-15 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है, खासकर मूल्य के प्रति संवेदनशील ग्रामीण बाजारों में। उपभोक्ता धीरे-धीरे हल्के वजन वाले आभूषण, कम कैरेट वाले उत्पाद, चांदी के आभूषण और एक्सचेंज आधारित खरीदारी की ओर रुख कर सकते हैं।

श्रीमती वालिया ने बताया कि रिटेलर्स और चेन शोरूम मालिकों पर इन्वेंट्री बदलने की लागत का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और उनका मुनाफा प्रभावित होगा। यदि मांग कमजोर बनी रहती है, तो इसका प्रभाव कारीगरों, सुनारों और ज्वेलरी डिजाइनरों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि ऑर्डर की मात्रा और कॉन्ट्रैक्ट वर्क में कमी आ सकती है, विशेष रूप से प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में।

धीरसन ज्वेलर्स के निदेशक राघव धीर ने कहा कि आयात शुल्क में संशोधन एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है। इससे आपूर्ति श्रृंखला में लागत बढ़ना तय है, यह उपभोक्ताओं के लिए यह सोचने का भी सही अवसर है कि वे सोने के साथ किस तरह जुड़ते हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी अपने ग्राहकों को पुराना सोना लाकर नये आभूषणों के साथ बदलने के लिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि देश में अनुमानित 25,000 टन सोना घरों में निष्क्रिय पड़ा है। यदि इसका थोड़ा सा हिस्सा भी विश्वसनीय और उपभोक्ता-अनुकूल कार्यक्रम के माध्यम से उपयोग में लाया जाए, तो इससे आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा पर दबाव घटेगा और घरेलू व्यापार को सार्थक रूप से बढ़ावा मिलेगा।

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) ने लोगों से घबराहट से बचने की अपील करते हुए कहा है कि वह कारीगरों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए इस क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए नीति-निर्माताओं के साथ रचनात्मक संवाद के प्रति प्रतिबद्ध है।

कल्याण ज्वेलर्स ने कहा है कि यह बदलाव सोने के अधिक समझदारीपूर्ण और टिकाऊ उपभोग को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उसने कहा कि इसमें सौंदर्य, कारीगरी या भावनात्मक मूल्य से कोई समझौता नहीं होगा। बाइस कैरेट की तुलना में 18 कैरेट आभूषणों में शुद्ध सोने की कम मात्रा की आवश्यकता होती है, जबकि उच्च गुणवत्ता, बारीक कारीगरी और डिजाइन-आधारित ज्वेलरी कलेक्शन तैयार किये जा सकते हैं।

कल्याण ज्वेलर्स के प्रबंध निदेशक टी.एस. कल्याणरमन ने कहा कि सोने के पुनर्चक्रण को नीतिगत चर्चाओं से परे वास्तविकता की धरातल पर उतारने की जरूरत है। इसमें उन परिवारों और समाज की भागीदारी महत्वपूर्ण है जिनके पास सोने का स्वामित्व सबसे गहराई से जुड़ा हुआ है।

बजाज ब्रोकिंग के अनुसंधान प्रमुख सुमित सिंघानिया ने कहा कि सरकार के इस कदम का उद्देश्य कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना है। इससे ज्वेलरी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि बढ़े हुए शुल्क से घरेलू सोने की कीमतें बढ़ेंगी और उपभोक्ता मांग कमजोर पड़ सकती है, विशेष रूप से सिक्के, मेडलियन और आभूषण जैसी खरीद पर इसका असर होगा। वहीं, मुथूट फाइनेंस और मन्नापुरम फाइनेंस जैसी गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियों को गिरवी रखे गये सोने के मूल्य बढ़ने से लाभ होने की संभावना है।

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