जयपुर , फरवरी 25 -- राजस्थान के स्वायत्त शासन राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार सोजत की पूर्व ग्राम पंचायत रायपुर में पट्टे जारी करने में अनियमितताओं के मामले में उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश को हटवाने के प्रयास करेगी।
श्री खर्रा प्रश्नकाल में विधायक शोभा चौहान के पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि न्यायालय के स्थगन आदेश के कारण राज्य सरकार द्वारा इस मामले में जांच कराया जाना संभव नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार द्वारा प्रभावी पैरवी कर स्थगन आदेश हटवाने के प्रयास किये जाएंगे। स्थगन आदेश निरस्त होने के बाद ही आवश्यकतानुसार पुलिस, भ्रष्टाचार निरोधक बयूरो (एसीबी) या विशेष अभियान दल (एसओजी) से प्रकरण की जांच कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस मामले में उच्च न्यायालय में अंतिम सुनवाई की तिथि आगामी गत वर्ष 27 मार्च निर्धारित थी। राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता से संपर्क कर मामले की यथाशीघ्र सुनवाई सुनिश्चित कराने तथा उपलब्ध तर्कों के आधार पर स्थगन आदेश निरस्त कराने के लिए कहा गया है।
उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टर ब्यावर द्वारा जिला परिषद सीईओ को संबंधित ग्राम विकास अधिकारी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। एफआईआर दर्ज होने से पूर्व ही ग्राम विकास अधिकारी ने राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी, जिस पर न्यायालय ने अग्रिम कार्यवाही कर एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा दी थी। उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र सोजत की पूर्व ग्राम पंचायत रायपुर में एक जनवरी 2020 से 31 मार्च 2024 तक सरपंचों द्वारा 1400 पट्टे जारी किये गये थे। इन पट्टों में अनियमितता के संबंध में शिकायत प्राप्त होने पर पंचायती राज विभाग द्वारा जांच प्रारम्भ की गई। इसी दौरान यह ग्राम पंचायत नगर पालिका में परिवर्तित हो गई थी।
इसके बाद नगरपालिका द्वारा ग्राम पंचायत से पट्टों से सम्बंधित समस्त रिकॉर्ड मांगा गया। उन्होंने बताया कि हालांकि पूर्ण रिकॉर्ड अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है लेकिन जारी किये गए 1400 पट्टों का रिकॉर्ड प्राप्त कर लिया गया है।
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