इटावा , अगस्त 6 -- उत्तर प्रदेश के इटावा स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी) में करोड़ों रुपये के फर्नीचर एवं फायर सेफ्टी उपकरणों की खरीद में वित्तीय अनियमितताओं का मामला विधान परिषद पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मुकुल यादव ने नियम-110 के तहत यह मुद्दा उठाते हुए दोनों मामलों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

एमएलसी मुकुल यादव ने प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश विधान परिषद को भेजी सूचना में कहा है कि विश्वविद्यालय में 25 करोड़ रुपये से अधिक के फर्नीचर की खरीद को लेकर गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में ऐसे फर्नीचर को भी कंडम घोषित कर दिया गया, जो उपयोग योग्य स्थिति में थे।

उन्होंने फर्नीचर को अनुपयोगी घोषित किए जाने की प्रक्रिया, नई खरीद की वास्तविक आवश्यकता, निविदा प्रक्रिया, मूल्य निर्धारण, गुणवत्ता परीक्षण तथा भुगतान संबंधी सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। एमएलसी ने अपने पत्र में विश्वविद्यालय में लगभग 20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से फायर सेफ्टी उपकरण एवं अग्निशमन सिलेंडरों की खरीद का मामला भी उठाया है। उनका आरोप है कि जिन भवनों में पहले से अग्नि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे, वहां भी नए उपकरण लगाए गए, जबकि पुराने उपकरणों का स्पष्ट अभिलेख उपलब्ध नहीं है। साथ ही उपकरणों की खरीद बाजार मूल्य से अधिक दरों पर किए जाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है।

उन्होंने प्रदेश सरकार से दोनों खरीद मामलों में निविदा प्रक्रिया, मूल्य निर्धारण, गुणवत्ता, उपयोगिता, भुगतान तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कराने तथा अनियमितता पाए जाने पर दोषी अधिकारियों एवं संबंधित फर्मों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

नियम-110 के तहत दी गई सूचना में मुकुल यादव ने इस पूरे प्रकरण को सार्वजनिक धन से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए सदन में इस पर चर्चा कराने तथा सरकार से आधिकारिक वक्तव्य दिलाने का भी अनुरोध किया है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में क्षेत्रीय विधायक शिवपाल सिंह यादव और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर भी समाजवादी पार्टी के नेताओं ने नाराजगी जताई थी। हालांकि, फर्नीचर एवं फायर सेफ्टी उपकरणों की खरीद में लगाए गए आरोपों पर उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (सैफई) प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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