इटावा , मार्च 20 -- उत्तर प्रदेश के इटावा जिले की सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में मूकबधिर महिला के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद सफाई कर्मियों के पुलिस वेरिफिकेशन का मुद्दा सुर्खियों में आ गया है।
पुलिस उपाधीक्षक रामगोपाल शर्मा ने बताया कि सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से पुलिस वेरिफिकेशन के सिलसिले में अगर पत्राचार किया जाएगा तो इटावा पुलिस सभी सफाई कर्मियों का पुलिस वेरीफिकेशन जरूर कराएगी। सफाई कर्मी कंपनी ने सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में जिन सफाई कर्मियों को तैनात किया है उनका पुलिस वेरीफिकेशन नियुक्ति के समय नहीं कराया गया है इसलिए रेप की घटना के बाद सभी सफाई कर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराए जाने की जरूरत महसूस हो रही है।
मानसिक रोग विभाग में भर्ती अज्ञात महिला से सफाई कर्मचारी द्वारा दुष्कर्म की घटना के बाद सफाई कार्य देख रही सन फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी परिसर में तैनात करीब 350 सफाई कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन न होना और निगरानी तंत्र का कमजोर होना अब बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। सितंबर 2022 से उक्त कंपनी के माध्यम से यूनिवर्सिटी में सफाई कार्य कराया जा रहा है। विभिन्न वार्डों, ओपीडी और संवेदनशील विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन कंपनी का कोई जिम्मेदार अधिकारी नियमित रूप से परिसर में मौजूद नहीं रहता। व्यवस्था मुख्य रूप से सुपरवाइजरों के भरोसे संचालित हो रही है, जबकि कंपनी प्रबंधन का आना-जाना प्रायः बिल भुगतान के समय तक सीमित बताया जाता है।
सबसे अहम तथ्य यह है कि इतने बड़े स्तर पर तैनात कर्मचारियों का समुचित पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया। शासन की स्पष्ट गाइडलाइन के बावजूद इस अनिवार्य प्रक्रिया की अनदेखी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। खासकर संवेदनशील वार्डों में बिना सत्यापन कर्मचारियों की तैनाती को बड़ी चूक माना जा रहा है।
यह पहला मामला नहीं है जब सफाई कर्मियों को लेकर सवाल उठे हों। वर्ष 2025 में यूनिवर्सिटी परिसर में मोबाइल चोरी की घटनाओं का खुलासा हुआ था, जिसमें इसी फर्म के अधीन कार्यरत एक सफाई कर्मचारी अपने साथी के साथ मिलकर वार्डों में सो रहे मरीजों और तीमारदारों के मोबाइल चोरी करते पकड़ा गया था। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके पास से कई मोबाइल बरामद किए थे,जिन्हे जेल भेजा था। लेकिन इसके बावजूद निगरानी और सत्यापन व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया।
यूनिवर्सिटी में प्रतिदिन 8 से 10 जनपदों से बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार इलाज के लिए पहुंचते हैं। पीडियाट्रिक्स और गायनी विभाग जैसे वार्डों में सबसे अधिक भीड़ रहती है, जहां पूर्व में चोरी की घटनाएं भी अधिक सामने आई हैं। ऐसे में सफाई कर्मचारियों की तैनाती और उनकी निगरानी और भी संवेदनशील हो जाती है।
ठेका प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। कंपनी को प्रारंभ में एक वर्ष के लिए अनुबंध दिया गया था, लेकिन बाद में समय-समय पर इसका विस्तार किया जाता रहा और फर्म करीब चार वर्षों से लगातार कार्यरत बनी हुई है। इस बीच कई बार नए टेंडर निकाले गए, लेकिन उन्हें निरस्त कर दिया गया। वर्तमान में भी नया टेंडर जारी है, जिसमें 25 से अधिक फर्मों ने प्रतिभाग किया है।
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