बैतूल , जून 12 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द बेचने के लिए किसानों के पंजीयन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष फर्जी पंजीयन के मामलों के सामने आने के बाद प्रशासन ने इस बार सत्यापन प्रक्रिया को सख्त कर दिया है, जिसके चलते पंजीयन की संख्या अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।

सरकारी योजना के तहत ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी के लिए 25 मई से ऑनलाइन पंजीयन प्रारंभ किया गया था, जिसकी अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित है। इसके बावजूद 11 जून तक जिले में केवल 515 किसानों ने पंजीयन कराया है। इनमें 511 किसानों ने मूंग तथा छह किसानों ने उड़द विक्रय के लिए आवेदन किया है।

कृषि विभाग के अनुसार जिले में इस वर्ष लगभग 15 हजार 435 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मूंग तथा 214 हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द की बोवनी की गई है। इसके मुकाबले अब तक केवल 863.35 हेक्टेयर क्षेत्र की मूंग और 13.69 हेक्टेयर क्षेत्र की उड़द फसल का ही उपार्जन के लिए पंजीयन हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि अंतिम दिनों में पंजीयन की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन इसके पिछले वर्ष के स्तर तक पहुंचने की संभावना कम है।

राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार इस बार पंजीयन प्रक्रिया में सैटेलाइट सर्वे को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। जिन खेतों में सैटेलाइट चित्रों में मूंग अथवा उड़द की फसल दिखाई दे रही है, वहीं गिरदावरी में संबंधित फसल दर्ज की जा रही है। सैटेलाइट आंकड़ों और राजस्व अभिलेखों के मिलान के बाद ही फसल रिकॉर्ड अद्यतन किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से फर्जी पंजीयन पर प्रभावी रोक लगेगी और केवल वास्तविक उत्पादक किसानों को ही समर्थन मूल्य योजना का लाभ मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जिले में समर्थन मूल्य पर ज्वार विक्रय के लिए बड़ी संख्या में संदिग्ध पंजीयन सामने आए थे, जिसके बाद लगभग 1150 पंजीयन निरस्त किए गए थे।

जिले में कुल 32 केंद्रों पर मूंग और उड़द उपार्जन के लिए पंजीयन किए जा रहे हैं। रानीपुर केंद्र में सर्वाधिक 60 किसानों ने 90.54 हेक्टेयर क्षेत्र की मूंग फसल के लिए पंजीयन कराया है, जबकि शाहपुर केंद्र में 59 किसानों ने 105.66 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए आवेदन किया है। इसके विपरीत भीमपुर, आमला और चांदू केंद्रों पर केवल एक-एक किसान का पंजीयन दर्ज हुआ है।

इस वर्ष सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8780 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। वहीं उड़द की खरीदी 8200 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तथा 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित कुल 8800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। वर्तमान में खुले बाजार में मूंग और उड़द के भाव समर्थन मूल्य से लगभग दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक कम बताए जा रहे हैं।

पिछले वर्ष जिले में 5153 किसानों ने मूंग विक्रय के लिए पंजीयन कराया था और 4394 किसानों ने 12 हजार 887 मीट्रिक टन मूंग की बिक्री की थी। इसके मुकाबले इस वर्ष अब तक पंजीयन का आंकड़ा लगभग 90 प्रतिशत कम है, जिससे स्पष्ट है कि सख्त सत्यापन प्रक्रिया ने उपार्जन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के साथ-साथ पंजीयन की गति को भी प्रभावित किया है।

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