रांची , मार्च 25 -- झारखंड में अफीम उन्मूलन को लेकर लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद तस्कर फिर से सक्रिय हो गए हैं।

हाल ही में सामने आई सैटेलाइट इमेज से यह खुलासा हुआ है कि राज्य के कई जिलों में अवैध रूप से अफीम की खेती न सिर्फ बची हुई है, बल्कि अब फसल तैयार होने की स्थिति में पहुंच गई है।

यह जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की रिपोर्ट में सामने आई है। एनसीबी ने सैटेलाइट इमेज के साथ झारखंड सीआईडी को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इन इमेज में उन स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां अवैध अफीम की खेती की जा रही है। संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि चिन्हित लोकेशन का ग्राउंड वेरिफिकेशन कर फसल को नष्ट किया जाए।

एनसीबी के अनुसार, नई दिल्ली स्थित सहायक निदेशक के माध्यम से ये सैटेलाइट तस्वीरें जुटाई गई हैं, जिन्हें जिप फाइल के रूप में ईमेल के जरिए झारखंड भेजा गया है। तस्वीरों में दिए गए अक्षांश और देशांतर के आधार पर संबंधित क्षेत्रों की पहचान कर कार्रवाई करने को कहा गया है।

सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण में सामने आया है कि सबसे अधिक मामले चतरा जिले में पाए गए हैं, जहां 10 अलग-अलग स्थानों पर अफीम की खेती के संकेत मिले हैं। इसके अलावा खूंटी में 4 स्थान, हजारीबाग में 3 स्थान तथा लातेहार और पश्चिमी सिंहभूम में 2-2 स्थानों पर खेती के प्रमाण मिले हैं। वहीं रांची और पतरातू में भी एक-एक स्थान पर इस तरह की गतिविधि पाई गई है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में अफीम का अवैध नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कई इलाकों में अब भी सक्रिय है। हालांकि सरकार और प्रशासन की ओर से अफीम उन्मूलन को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन तस्कर नए तरीके अपनाकर खेती को बचाने में सफल हो रहे हैं।

एनसीबी ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि चिन्हित क्षेत्रों में जल्द कार्रवाई कर अवैध फसल को नष्ट किया जाए और पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट शीघ्र ही एनसीबी को भेजी जाए।

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