हमीरपुर , फरवरी 27 -- हिमाचल प्रदेश सरकार में जैविक खेती को बढ़ावा देने की खास कोशिशों की वजह से कई किसान न सिर्फ अपने लिए सुरक्षित सब्जियां उगा रहे हैं, बल्कि उर्वरक और ज़हरीले कीटनाशक का इस्तेमाल छोड़कर अपने खेतों में सिर्फ गोबर या घर में बनी चीज़ों का इस्तेमाल करके अपनी आय भी काफी बढ़ा रहे हैं।

भोरंज उपखंड की भुक्कड़ ग्राम पंचायत के बाड़ी ब्राह्मणा गांव की सेवानिवृत शिक्षक शीला देवी और उनके परिवार ने यह करके दिखाया है। शीला देवी और उनका परिवार अपनी ज़मीन पर पारंपरिक तरीके से गेहूं, मक्का और धान की खेती करते आ रहे थे। इससे पैदावार बहुत कम होती थी एवं उर्वरक के इस्तेमाल से उनका खर्च भी बढ़ रहा था।

यह देखकर शीला देवी ने प्राकृतिक तरीकों से आलू उगाने का फैसला किया। पहली बार उन्होंने पांच किलोग्राम आलू बोए। उन्होंने सिर्फ गोबर की खाद का इस्तेमाल किया, जिससे करीब साढ़े चार क्विंटल पैदावार हुई। इससे उत्साहित होकर शीला देवी ने बड़े पैमाने पर आलू की खेती करने का फैसला किया और कुछ मज़दूर भी रखे।

उन्होंने पिछले सत्र में ही लगभग एक बीघा ज़मीन से अच्छी मात्रा में आलू की फ़सल ली। शीला देवी ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में किसी भी उर्वरक या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया और उपयुक्त सिंचाई सुविधा की कमी के बावजूद अच्छी पैदावार हासिल की।

शीला देवी का कहना है कि राज्य सरकार बड़े पैमाने पर जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है, जो बहुत तारीफ़ के काबिल है। इस खेती से न सिर्फ़ सुरक्षित अनाज मिलता है बल्कि खेती की लागत भी कम होती है। इस तरह की खेती किसान के लिए फ़ायदेमंद है।

उन्होंने बताया कि पहले उनके इलाके में आलू की खेती नहीं होती थी, लेकिन उनके परिवार की सफलता को देखकर गाँव के दूसरे किसान भी इस तरह की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार बड़े पैमाने पर जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। राज्य सरकार ने जैविक खेती से उगायी गयी मक्का, गेहूँ और हल्दी के लिए अलग-अलग ऊँची कीमतें तय की हैं।

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