कोलकाता , जुलाई 01 -- पश्चिम बंगाल में सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए गठित न्यायाधिकरण से व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है।

उनका इस्तीफा कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम द्वारा मई में इन्हीं आधारों पर न्यायाधिकरण से हटने के बाद आया है। इस न्यायाधिकरण का गठन उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद किया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को रिटायर्ड जजों का एक पैनल बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी, ताकि मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान विचाराधीन सूची में शामिल नामों से जुड़े मामलों पर फ़ैसला किया जा सके।

न्यायाधिकरण तब से याचिकाओं की सुनवाई और विवादित प्रविष्टियों का सत्यापन कर रहा था। न्यायाधीश बाग ने अपने इस्तीफे से पहले कई मामलों पर निर्णय भी सुना चुके हैं।

सूत्रों के अनुसार, लगभग 27 लाख नाम निर्णय के लिए न्यायाधिकरण के पास भेजे गए हैं। हालांकि, अब तक केवल 28 से 30 हजार मामलों का ही निपटारा हो सका है। न्यायाधिकरण वर्तमान में एक दिन में केवल 50-60 मामलों का फैसला करने में सक्षम है, और अधिकारियों ने इस धीमी गति का कारण अपर्याप्त बुनियादी ढांचे को बताया है।

न्यायाधिकरण से जुड़े सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने कथित तौर पर इस बात पर प्रकाश डाला है कि यह प्रक्रिया नियमित अदालती कार्यवाही जितनी ही कठिन है। प्रत्येक मामले में दस्तावेजों की विस्तृत जांच की आवश्यकता होती है, और कई मामलों में आवेदकों को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना पड़ता है। हालांकि, न्यायाधिकरण के पास समानांतर न्यायिक कार्यवाही को कुशलतापूर्वक संचालित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का अभाव है।

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