नयी दिल्ली , फरवरी 27 -- सेना प्रमुखों का दसवां सम्मेलन शुक्रवार को यहां शुरू हुआ जिसमें सेनाओं की संचालन तत्परता, क्षमता विकास और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गयी। दो दिन के इस सम्मेलन में सेना के पूर्व प्रमुखों के अलावा नेपाली सेना में भारतीय सेना के मानद जनरल रहे सैन्य अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
नेपाल सेना के इन शीर्ष सैन्य अधिकारियों की भागीदारी सम्मेलन की विश्व स्तर पर अद्वितीय और ऐतिहासिक सैन्य परंपरा को दर्शाती है जो आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और एक समान सैन्य विरासत पर आधारित भारत-नेपाल के असाधारण और स्थायी सैन्य संबंधों का प्रतीक है। यह विशिष्ट व्यवस्था भारत के 'विश्वबंधु' के सभ्यतागत लोकाचार और 'पड़ोसी पहले' के सिद्धांत के अनुरूप है जो अपने पड़ोसी देशों के साथ सुदृढ़ और दोनों देशों के लोगों के बीच परस्पर संबंधों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
यह सम्मेलन मौजूदा सैन्य नेतृत्व और पूर्व सेना प्रमुखों के बीच पेशेवर बातचीत के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत मंच प्रदान करता है, जो पीढ़ियों के बीच निरंतरता और सामूहिक ज्ञान को मजबूत करता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि समारोह के साथ हुआ जिसके बाद संचालन तत्परता, क्षमता विकास और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। पूर्व सेना प्रमुख निर्धारित कार्यक्रमों के अंतर्गत चुनिंदा सैन्य प्रतिष्ठानों और सांस्कृतिक स्थलों का भी दौरा करेंगे।
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