मथुरा , अक्टूबर 03 -- ब्रजभाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में शनिवार को महत्वपूर्ण पहल हुई। सूरदास की तपोस्थली पारासौली में उनकी कुटी के निकट नवनिर्मित सूरदास ब्रजभाषा अकादमी के भवन का उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने फीता काटकर शुभारंभ किया।
इस अवसर पर 'ब्रजभाषा का मानकीकरण और व्यावहारिकता' विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें साहित्यकारों, विद्वानों और भाषा विशेषज्ञों ने ब्रजभाषा के संरक्षण, व्यावहारिक प्रयोग और शोध को बढ़ावा देने पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शैलजाकांत मिश्र ने अकादमी की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ब्रजभाषा को जीवंत बनाए रखने के लिए उसे साहित्य और पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय आम बोलचाल, सामाजिक संवाद और दैनिक व्यवहार में इस्तेमाल करना जरूरी है। भाषा समय के साथ विकसित होती है और दूसरी भाषाओं के प्रचलित शब्दों को सहजता से अपनाने से उसकी व्यावहारिकता बढ़ सकती है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एवं साहित्यकार डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी ने कहा कि सूरदास की तपोस्थली और महाप्रभु वल्लभाचार्य की बैठक के निकट अकादमी की स्थापना ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने ब्रजभाषा के मानकीकरण के साथ इसके व्यापक प्रचार-प्रसार और दैनिक व्यवहार में उपयोग पर जोर दिया।
संत हरिओम बाबा ने ब्रज की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण तथा उन्हें जीवंत बनाने के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
अकादमी के निदेशक डॉ. केशव देव शर्मा ने ब्रजभाषा में संबोधन करते हुए कहा कि भाषा के संरक्षण के लिए शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना, व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करना और नियमित पत्रिका का प्रकाशन आवश्यक है। सूरदास के पदों सहित ब्रज के समृद्ध साहित्य का संकलन और संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रचनाकारों, साहित्यकारों और ब्रजभाषा के विद्वानों को साथ लेकर अकादमी को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
दूरदर्शन मथुरा के निदेशक सत्यव्रत सिंह ने बताया कि आकाशवाणी के अभिलेखागार में करीब आठ हजार टेप सुरक्षित हैं, जिनमें लगभग 2,400 ब्रजभाषा के लोकगीत, वार्ताएं, ढोला, रेखाचित्र और नौटंकी सहित विभिन्न कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस सामग्री का उपयोग अकादमी के शोध, अभिलेखीकरण और प्रचार-प्रसार में किया जा सकता है।
ब्रज माधुरी की एंकर चंद्रवती ने कहा कि ब्रजभाषा के संरक्षण के लिए साहित्य के साथ लोक कलाकारों और उभरती प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहित कर उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराना जरूरी है। संगोष्ठी का संचालन हंसराज कॉलेज, दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर एवं साहित्यकार डॉ. नृत्य गोपाल शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि सूरदास की तपोस्थली पर अकादमी की स्थापना से ब्रजभाषा के साहित्यिक और सांस्कृतिक वैभव को नई पहचान मिलेगी तथा नई पीढ़ी अपनी भाषाई विरासत से जुड़ सकेगी।
कार्यक्रम के अंत में परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव पांडेय ने अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों और ब्रजभाषा के विद्वानों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि मनीष शर्मा, सत्यप्रकाश शर्मा 'सोटानंद', नरेंद्र कुमार नरेंद्र, ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा, नीतू गोस्वामी, रेनू उपाध्याय, कपिल देव उपाध्याय, विट्ठल पारीक, डॉ. रश्मि वर्मा, कुबेर दत्त गौतम, पूनम शर्मा, हरी बाबू ओम, देवेंद्र शर्मा, देवी प्रसाद गौड़, महेंद्र सिंगला, दूधनाथ यादव, गीता शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार तथा राजस्व समन्वयक चंद्रिका प्रसाद राय सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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