नयी दिल्ली , जनवरी 14 -- प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने बुधवार को सूमाया समूह और अन्य से जुड़े एक मामले में 35.22 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों की कुर्की की घोषणा की। इन संपत्तियों में बैंक बैलेंस, डीमैट होल्डिंग्स और म्यूचुअल फंड जैसी चल संपत्तियाँ तथा दो अचल संपत्तियाँ शामिल हैं।

ईडी ने यह जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुरू की थी, जो वर्ली पुलिस थाने द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर की गई। प्राथमिकी में सूमाया इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, उसके प्रमोटर्स और अन्य व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर आरोप है कि उन्होंने भविष्य की 'नीड टू फीड' योजना के तहत लाभ दिलाने का झूठा वादा कर लगभग 137 करोड़ रुपये का गबन किया है।

ईडी की जांच में आगे खुलासा हुआ कि सूमाया समूह और उसके सहयोगियों ने धन और ट्रेड फाइनेंसिंग प्राप्त करने के लिए 'नीड टू फीड' कार्यक्रम के तहत हरियाणा सरकार का एक फर्जी अनुबंध तैयार किया। इस योजना का उपयोग गैर-मौजूद व्यावसायिक गतिविधियों को वास्तविक टर्नओवर के रूप में दिखाने के लिए किया गया। जांच में ईडी ने बताया कि सूमाया समूह की कंपनियों को प्राप्त धन को प्रमोटर उशिक गाला ने एक एजेंट के माध्यम से दिल्ली और हरियाणा की डमी एग्रो ट्रेडर इकाइयों में भेजा, जिसे फर्जी ढंग से वास्तविक खरीद दर्शाया गयी।

ईडी के अनुसार, वास्तव में कोई कृषि उत्पाद की खरीद नहीं हुई। इन गलत तरीके से भेज गये धन को नकद और आरटीजीएस लेनदेन के मिश्रण के जरिए अन्य शेल कंपनियों से वापस उशिक गाला तक पहुँचाया गया।

सूमाया ने बड़े पैमाने पर व्यापार दिखाने के लिए फर्जी इनवॉइस और लॉरी रसीदें तैयार कीं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 5,000 करोड़ रुपये के चक्रीय लेनदेन हुए, जिनमें से केवल करीब 10 प्रतिशत ही वास्तविक थे। इन सर्कुलर लेनदेन से संबंधित कंपनियों का टर्नओवर कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया।

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