जौनपुर , अप्रैल 29 -- आदि गंगा गोमती के पावन तट पर बसी सिराज-ए- हिन्द की जौनपुर नगरी में स्थित मोहल्ला रौजा अर्जन निकट मल्हनी पड़ाव के पास हजरत मौलाना सादिक अली शाह रहमुल्लाह उर्फ भूंदरा शाह बाबा की समाधि चित्रसारी मार्ग पर स्थित है। भूदरा शाह बाबा का सालाना 407 वां उर्स तीस अप्रैल को मनाया जाएगा। बाबा की मजार पर आने वाले की हर एक व्यक्ति की मुरादे पूरी हो जाती है।

भूदरा शाह बाबा एक प्रख्यात सूफी संत हजरत शेख फतरूख्वाह हक्कानी कादरी की औलाद और ईश्वर लीन फकीरों में एक थे, जो सबके दिलों की बात अच्छी तरह से जानते थे। बताया जाता है कि भूंदरा शाह बाबा जमीन के अन्दर गार और वीराने में रहा करते थे। बाबा ऐसे स्थान पर रहना पसन्द करते थे जहां दूसरों का आना जाना बहुत कम होता था। जिस गार में बाबा रहते थे उसके ऊपर दो काले रंग के कुत्ते बैठे रहते थे, जब कोई भी व्यक्ति किसी जरूरत से बाबा के पास आता था, वह कुत्तों के सामने हलुआ डालता था। यदि कुत्ता हलुआ खा लेता था तो वह व्यक्ति बाबा के सामने जाता था। अगर कुत्ते ने हलुआ नहीं खाया तो वह व्यक्ति पास नहीं जाता था और उसका काम भी नहीं होता था।

भूंदरा शाहबाबा दीर्घ काल तक अपने यहां आने वालों का लाभ पहुंचाते रहे। बाबा का देहान्त नौ शाबान 1030 हिजरी यानि 1620 को हुआ था। बाबा के मानने वालों ने उस गार के ऊपर भव्य रौजा भवन बनवाया है। जहां हर साल 30 अप्रैल को सालाना उर्स मनाया जाता है।

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