नैनीताल , नवम्बर 14 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को जारी अपने अहम निर्णय में प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि कुमाऊं की जनता की लाइफ लाइन कहे जाने वाले हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्य सुविधाओं का दुबारा व्यापक निरीक्षण करें और अदालत में रिपोर्ट पेश करें।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश जारी किये।

आज प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव की ओर से खंडपीठ के समक्ष नैनीताल स्थित बीडी पांडे जिला अस्पताल और हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल की निरीक्षण रिपोर्ट सौंपी गई। बीडी पांडे अस्पताल का निरीक्षण स्वास्थ्य सचिव जबकि सुशीला तिवारी अस्पताल का निरीक्षण स्वास्थ्य निदेशक की ओर से किया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली की ओर से अदालत को बताया गया कि बीडी पांडे जिला अस्पताल को लेकर स्वास्थ्य सचिव की ओर से व्यापक रिपोर्ट तैयार की गई है और भवन और अन्य सुविधाओं के मद में शासन से लगभग 74 लाख रुपए की मांग की गयी है।

आगे कहा गया कि सुशीला तिवारी अस्पताल को लेकर स्वास्थ्य निदेशक की ओर से जो रिपोर्ट तैयार की गई है वह असंतोषजनक है। उसमें सिर्फ खानापूर्ति की गई है। अदालत ने रिपोर्ट को अपर्याप्त मानते हुए स्वास्थ्य सचिव को दुबारा निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने सरकार से यह भी पूछा है कि बीडी पांडे जिला अस्पताल को लेकर मांगे गए 74 लाख के फंड के संबंध में सरकार की ओर से क्या कदम उठाए गए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

यहां बता दें कि वर्ष 2025 में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रदेश के 13 जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवायें मुकम्मल नहीं हैं। भारत सरकार के स्वास्थ्य मानकों के हिसाब से विशेषज्ञ चिकित्सक और चिकित्साधिकारी मौजूद नहीं हैं। पैरा मेडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है।

कई जिला अस्पतालों में शल्य चिकित्सा (सर्जरी) को लेकर जो इंतजाम हैं वह नाकाफी हैं। यह भी कहा गया कि प्रदेश सरकार जनता को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रही है। अल्मोड़ा के चैखुटिया में चिकित्सकों की कमी को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं।

आगे कहा गया कि यही हाल नैनीताल स्थित बीडी पांडे जिला अस्पताल का है। उच्चतम न्यायालय को दिये गये आश्वासन के बाद भी प्रदेश सरकार की ओर से बीडी पांडे अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा नहीं किया गया है।

इसके बाद खंडपीठ ने स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य निदेशक को तलब किया था और हल्द्वानी और नैनीताल स्थित अस्पतालों के निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।

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