कौशांबी , अगस्त 19 -- उत्तर प्रदेश में कौशांबी के जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल ने तहसील चायल के ग्रामसभा बरौलहा में सुरक्षित श्रेणी की ककरोली भूमि पर विधिविरुद्ध दर्ज 115 खातेदारों के नाम निरस्त करने की कार्रवाई की है। करीब 75 बीघा भूमि पर लगभग 45 वर्षों से गैरकानूनी ढंग से खातेदारों के नाम दर्ज बताए जा रहे थे।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जमींदारी उन्मूलन वर्ष 1952 से चकबंदी तक बरौलहा गांव में कुल 23 गाटों में 121 बीघा 14 बिस्वा ककरोली खाते की भूमि दर्ज रही है। राजस्व नियमों के अनुसार ककरोली भूमि सार्वजनिक उपयोगिता की सुरक्षित श्रेणी में आती है और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 77 के अंतर्गत ऐसी भूमि पर किसी व्यक्ति को पट्टा नहीं दिया जा सकता।
इसके बावजूद वर्ष 2006 और 2016 में तत्कालीन भूमि प्रबंधक समिति की ओर से प्रस्ताव पारित कर इस भूमि का पट्टा स्वीकृत कराया गया। इसके बाद ककरोली खाते की करीब 75 बीघा भूमि पर 115 लोगों के नाम बतौर खातेदार दर्ज हो गए।
उप जिलाधिकारी चायल प्रेरणा गौतम ने इन प्रविष्टियों को निरस्त करने के लिए स्वप्रेरणा से आख्या जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की। जिलाधिकारी ने संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद 115 खातेदारों के नाम निरस्त कर भूमि को पुन: ग्रामसभा के ककरोली खाते में दर्ज करने की कार्रवाई की है।
सूत्रों ने बताया कि इससे पहले भी बरौलहा गांव की करीब 20 बीघा ककरोली भूमि पर दर्ज नाम निरस्त कर उसे ग्रामसभा के खाते में दर्ज कराया जा चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि बरौलहा की ककरोली भूमि पर सिकंदरपुर बजहा, इमली गांव, बुआराम का पूरा और भगवतपुर समेत अन्य गांवों के काश्तकारों के नाम भी दर्ज हैं। इसी भूमि के अभिलेखों में जनता जूनियर हाईस्कूल बरौलहा और केपी डिग्री कॉलेज का नाम भी दर्ज बताया गया है, जहां विद्यालय संचालित होने की जानकारी है।
प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक उपयोगिता की सुरक्षित भूमि पर किसी व्यक्ति को वैध स्वत्व हासिल नहीं हो सकता। ऐसी भूमि को चिन्हित कर राजस्व अभिलेखों को नियमानुसार दुरुस्त कराने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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