भुवनेश्वर , सितंबर 09 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने एक 19 वर्षीय युवक की गिरफ्तारी के दौरान 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (बीएनएसएस) के अंतर्गत ज़रूरी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का कथित उल्लंघन करने के लिए बडगड़ा थाने के पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
न्यायालय ने इसके साथ ही राज्य सरकार को गिरफ्तारी मेमो, चेकलिस्ट और अन्य संबंधित रिकॉर्ड न्यायिक जांच के लिए पेश करने का निर्देश दिया है।
युवक के पिता ने इस मामले में याचिका दायर किया जो न्यायमूर्ति आर.के. पटनायक के सामने आया। पिता ने बडगड़ा थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज तृप्ति रंजन नायक और एक अन्य पुलिस अधिकारी के खिलाफ़ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि कथित तौर पर बीएनएसएस की धारा 35(3) का पालन किये बिना उनके बेटे को गिरफ्तार किया था।
धारा 35(3) के तहत, जिन मामलों में गिरफ़्तारी ज़रूरी नहीं है उसमें पुलिस अधिकारी को तुरंत गिरफ़्तार करने के बजाय उस व्यक्ति को लिखित नोटिस जारी करके पुलिस के सामने पेश होने का निर्देश देना होता है। बडगड़ा पुलिस ने एक युवक को एक युवती की निजी तस्वीरें उसकी जानकारी के बिना फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। खुर्दा सत्र न्यायालय ने हालांकि उसे ज़मानत दे दी। न्यायालय ने पाया कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि उसने ही तस्वीरें प्रसारित की थीं। इसके बाद युवक ने बडगड़ा थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान, दोनों पक्षों के वकीलों ने बताया कि विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है।
समझौते के मद्देनजर न्यायालय ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही जारी रखना बेकार होगा और यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसके बाद प्राथमिकी रद्द कर दी गयी।
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