नयी दिल्ली , अगस्त 14 -- उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर में बंद राजमार्गों पर आवाजाही बहाल करने के लिए ठोस प्रस्ताव की मांग करते हुए राज्य और अन्य को शुक्रवार को नोटिस जारी किये।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 'कुकी महिला संगठन फॉर ह्यूमन राइट्स' की याचिका पर राज्य और अन्य को नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कांगपोकपी ज़िले के कुकी-जो आबादी वाले इलाकों में नागा समूह ने राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया है जिससे जरुरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो रही है।
न्यायालय ने कहा कि किसी एक राजमार्ग या उसके एक हिस्से को खोलने और दूसरे को बंद रखने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने राजमार्ग को आम लोगों के लिए भोजन, दवा, ईंधन और अन्य जरुरी वस्तुओं के पहुंचने का 'जीवन-आधार' बताते हुए कहा कि नाकेबंदी से किसी समुदाय का भला नहीं हो रहा है, बल्कि सभी को परेशानी हो रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने पीठ को बताया कि नाकेबंदी के कारण भोजन की कमी हो गयी है और स्कूली शिक्षा पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि कुकी उग्रवादियों ने तो अपनी नाकेबंदी हटा ली है, लेकिन नागा उग्रवादी अभी भी राजमार्ग को ब्लॉक किये हुए हैं।
इस मामले में पक्षकार बनने की मांग कर रहे मैतेई संगठन के एक वकील ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि मणिपुर में राजमार्ग 2023 से ही कुकी समुदाय द्वारा ब्लॉक किये गये हैं।
दोनों पक्षों की दलीलों पर गौर करते हुए पीठ ने कहा कि इस मुद्दे को अलग-अलग नाकेबंदी को संबोधित करके हल नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "ऐसा नहीं हो सकता कि एक राजमार्ग खुला हो और दूसरा नहीं। हम चाहते हैं कि आप दोनों जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी राजमार्ग खुले रहें।"न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को भी मामले में पक्षकार बनाया, क्योंकि वहीं राजमार्गों का रखरखाव वही करती है।
पीठ ने काउंटर-एफिडेविट (जवाबी हलफनामा) के बजाय सभी बंद राजमार्ग को बहाल करने और उन्हें चालू रखने के लिए पार्टियों से ठोस प्रस्ताव मांगे।
न्यायालय ने कहा, "हमें काउंटर-एफिडेविट (राज्य से जवाब, जिसे नोटिस जारी किया गया है) नहीं चाहिए। हमें एक प्रस्ताव चाहिए।"मैतेई संगठन से कहा गया कि वे उन दूसरे राजमार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग की जानकारी दें जिन्हें कथित तौर पर अलग-अलग समूहों ने ब्लॉक कर रखा है, और साथ ही उन्हें फिर से चालू करने का प्रस्ताव भी दें। याचिकाकर्ता संगठन को एक विस्तृत प्रस्ताव जमा करने का भी निर्देश दिया गया।
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