नयी दिल्ली , फरवरी 27 -- उच्चतम न्यायालय ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाले वकील को शुक्रवार को कड़ी फटकार लगायी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जाॅयमाल्या बागची की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उल्लेखनीय है कि राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज करने के याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय में अपील की थी।

न्यायालय ने याचिका के आधार पर ही सवाल उठाए। पीठ ने अधिवक्ता से पूछा की इस तरह की याचिका के लिए क्या उच्च न्यायालय ने उन पर जुर्माना नहीं लगाया था।

इस पर न्यायालय को सूचित किया गया कि उच्च न्यायालय पहले ही जुर्माना लगा चुका है। फिर पीठ ने वकील से बार काउंसिल में उनके अनुभव के बारे में पूछा। यह बताए जाने पर कि वह 1995 से वकालत कर रहे हैं, मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी व्यक्त की और उनसे ऐसी याचिकाएं दायर न करने को कहा। उन्होंने टिप्पणी की कि लोग कानूनी पेशे के सदस्यों पर भरोसा करते हैं।

वकील द्वारा खेद व्यक्त करने और भविष्य में ऐसी कार्यवाही न करने का वचन देने के बाद न्यायालय ने निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय का 50,000 रुपये का जुर्माना लगाने वाला आदेश अनिश्चित काल के लिए स्थगित रहेगा। साथ ही पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वह उच्चतम न्यायालय के समक्ष दिए गए वचन का उल्लंघन करते हैं, तो आदेश स्वतः ही प्रभावी हो जाएगा।

न्यायमूर्ति बागची ने चेतावनी दी कि किसी कानून या विचारधारा से असहमति को अपराध में नहीं बदला जा सकता। न्यायालय ने पूछा, "यदि संसद कोई अवैध कानून पारित करती है, तो क्या यह अपराध है?" न्यायालय ने संकेत दिया कि इसका समाधान संवैधानिक चुनौती में निहित है, न कि कानून बनाने वालों के अभियोजन में। पीठ ने चेतावनी दी कि यदि वकील मामले को आगे बढ़ाते हैं, तो वह जुर्माने की राशि बढ़ा सकती है।

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