कोलकाता , दिसंबर 06 -- पांच महीने पहले 'घुसपैठिया' होने के शक पर अपने आठ साल के पुत्र के साथ बंगलादेश भेज दी गयी एक गर्भवती भारतीय महिला उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद स्वदेश लौट आयी है और उसे उसके घर पहुंचा दिया गया है।
दिल्ली पुलिस ने बंगलादेशी होने के शक पर उस महिला को निर्वासित कर दिया था, जिसके बाद उसने बंगलादेश की एक जेल में पांच महीने गुज़ारे। अपने नाबालिग पुत्र के साथ मालदा की मेहदीपुर सीमा से भारत पहुंचने के बाद शनिवार को उस महिला को बीरभूम जिले में उसके घर पहुंचाया गया।
सुनाली खातून को पुत्र के साथ शुक्रवार रात को बंगलादेश सीमा गार्ड (बीबीजी) ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) को सौंप दिया। मौके पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद समीरुल इस्लाम भी मौजूद रहे।
सुनाली खातून को मालदा अस्पताल में चिकित्सीय जांच के बाद बीरभूम में उनके माता-पिता के घर ले जाया गया। उन्हें आगे की चिकित्सीय जांच के लिए रामपुरहाट के एक अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
सुश्री खातून ने यहां संवाददाताओं से कहा कि निर्वासन के समय उन्होंने भारतीय अधिकारियों को अपनी भारतीयता के बारे में सूचित किया था, लेकिन उनकी बातों को नज़रंदाज़ करते हुए दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और जून 2025 में उन्हें सीमा पार एक जंगल में छोड़ दिया गया।
बंगलादेश में गर्भावस्था के दौरान पांच महीने गुज़ारने और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुश्री खातून शुक्रवार रात स्वदेश लौटीं। दिल्ली पुलिस ने उनके अलावा बीरभूम जिले के पांच अन्य लोगों को हिरासत में लेकर बंगलादेशी होने के 'शक' पर सीमा पार धकेल दिया था।
स्वीटी बीबी, उनके दो पुत्र सहित चार लोग भी उच्चतम न्यायालय के प्रत्यावर्तन आदेश के बाद जल्द ही भारत लौट सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि इनकी बुरी हालत तब सामने आयी जब इस समूह ने बंगलादेश से एक वीडियो जारी करके पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मदद की अपील की थी। सुश्री खातून ने उन्हें घर लाने के लिये और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिये सुश्री बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की कोशिशों की सराहना की।
इस घटना को सामने लाने वाले तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष समीरुल इस्लाम ने कहा, " महीनों की परेशानी के बाद, सुनाली और उसका पुत्र आखिरकार घर लौट आये हैं। "कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पहले 26 सितंबर को सुश्री खातून के पिता भादू शेख और आमिर खान की दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी छह लोगों को वापस भेजने का आदेश दिया था।
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