अगरतला , जुलाई 03 -- त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी से संबंधित जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर एक पुलिस उपनिरीक्षक को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए उस पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया और चेतावनी दी कि जुर्माना न भरने पर उसे जेल भी हो सकती है।

यह मामला अप्रैल में सैकत साहा की गिरफ्तारी से जुड़ा है। अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए की गई थी। अदालत की अवमानना की यह कार्यवाही गिरफ्तार युवक की मां रत्ना रॉय की ओर से दायर याचिका पर शुरू हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनके बेटे को गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा गया और उसके साथ मारपीट की गई।

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पुलिस थाना के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया और आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाई। एसआईटी को ऐसे सबूत मिले जिनसे पता चला कि युवक के साथ पुलिस थाने के अंदर मारपीट की गई थी और यह घटना दो लाख रुपये की कथित मांग से जुड़ी थी।

अदालत ने अधिकारी के इस दावे को खारिज कर दिया कि युवक नशे में था और सार्वजनिक रूप से हंगामा कर रहा था। अदालत ने पुलिस रिकॉर्ड, जनरल डायरी एंट्री और एसआईटी की जांच के नतीजों में विसंगतियों का हवाला दिया।

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