पुणे , अप्रैल 21 -- महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष को दी गई खुली बहस की चुनौती को स्वीकार करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-शरद पवार गुट) सांसद सुप्रिया सुले ने कहा है कि उनकी पार्टी 33 प्रतिशत आरक्षण को परिसीमन का इंतजार किए बिना तुरंत लागू करने के पक्ष में है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस बातचीत के लिए कोई समय और स्थान सुझाने का आग्रह किया, जो एक तरह से एक जवाबी चुनौती थी। सुश्री सुले ने यह भी सवाल उठाया कि 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक लागू क्यों नहीं किया गया है।
सुश्री सुले ने बारामती विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा से पहले दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की यादों को ताजा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर वह अपनी पार्टी के भीतर इसी तरह का आरक्षण लागू करने में हिचकिचाती भी है।
सुश्री सुले ने कहा, "यदि भाजपा वास्तव में महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे चुनावों में अधिक महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारना चाहिए। उन्हें ऐसा करने से कोई नहीं रोक रहा है।" उन्होंने सुश्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का उदाहरण दिया, जहां 40-50 प्रतिशत निर्वाचित प्रतिनिधि महिलाएं हैं।
सुश्री सुले ने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था, जिससे 2024 में इसके लागू न होने पर सवाल उठते हैं।
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