मुंबई , अगस्त 25 -- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने मंगलवार को महाराष्ट्र और केंद्र सरकार पर पर वंचित वर्गों की उपेक्षा करने, लोक धन के कुप्रबंधन और कृषि नीतियों में अस्थिरता बरतने का गंभीर आरोप लगाया।
सुश्री सुले ने उन खबरों पर कड़ा विरोध व्यक्त किया जिनमें कहा गया है कि 'मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना' के वित्तपोषण के लिए सामाजिक न्याय विभाग को आवंटित धन को कहीं और खर्च किया जा रहा है।
संवाददाताओं से बात करते हुए सुश्री सुले ने कहा, "शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए तय संसाधनों को दूसरी योजनाओं में लगाना बेहद संवेदनहीनता है।" उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों से ठीक पहले जनकल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करना और बाद में बजट की कमी का हवाला देकर उनके लाभों को सीमित कर देना लाभार्थियों के साथ विश्वासघात है।
बारामती सीट से सांसद श्रीमती सुले ने योजना के शुरुआती चरण में केवाईसी सत्यापन सहित विभिन्न आधारों पर बड़े पैमाने पर महिलाओं को अयोग्य ठहराये जाने पर भी सवाल उठाये।
उन्होंने पूछा कि जब देश के सुदूर क्षेत्रों तक डिजिटल और बैंकिंग सुविधाएं पहुंच चुकी हैं, तो ग्रामीण इलाकों की लाभार्थी महिलाओं को प्रशासनिक बाधाओं का सामना क्यों करना पड़ रहा है? उन्होंने आशंका जतायी कि इन प्रशासनिक अड़चनों के कारण लाभार्थियों की संख्या में जानबूझकर कटौती हो सकती है।
सार्वजनिक खर्चों पर बात करते हुए श्रीमती सुले ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश प्रसन्न वराले की टिप्पणियों का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य में स्कूलों, आश्रम शालाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की जर्जर हालत की तुलना बड़े-बड़े मेगा प्रोजेक्ट और भव्य आयोजनों पर किये जा रहे भारी खर्च से करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किये।
श्रीमती सुले ने केंद्र सरकार की कृषि नीतियों की भी कड़ी आलोचना की, विशेष रूप से प्याज, चीनी और चावल जैसी वस्तुओं पर लगातार बदले जाने वाले निर्यात प्रतिबंधों का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा, " केंद्र की अस्थिर कृषि नीतियां, आवश्यक वस्तुओं के निर्यात पर बार-बार लगाये जाने वाले प्रतिबंध और कृषि एवं वाणिज्य मंत्रालयों के बीच तालमेल की कमी से स्थानीय किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच पर भारत की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है।"इसके साथ ही उन्होंने विदेश नीति, क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ते आर्थिक दबावों पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार से एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी मांग की।
राजनीतिक विलय से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए श्रीमती सुले ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की अध्यक्षता में होने वाली बैठकें पूरी तरह से नियमित संगठनात्मक समीक्षा बैठकें हैं।
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