विदिशा , सितंबर 06 -- मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में खाद्य पदार्थ सांस की नली में फंसने से गंभीर हुए दो बच्चों का विदिशा मेडिकल कॉलेज में सफल उपचार किया गया। एक आठ माह की बच्ची की सांस की नली में सुपारी का टुकड़ा और दो वर्षीय बच्चे की सांस की नली में मूंगफली फंस गई थी। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग के चिकित्सकों ने ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से दोनों बच्चों की सांस की नली से खाद्य पदार्थ निकालकर उनकी जान बचाई।

नटेरन तहसील के सिरसी गांव निवासी कन्हैयालाल की आठ माह की बेटी चाहत ने 21 अगस्त को खेलते समय सुपारी का टुकड़ा निगल लिया था। दूध पिलाते समय बच्ची को तेज ठसका लगा और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन उसे नटेरन और इसके बाद जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। गंभीर स्थिति को देखते हुए बच्ची को विदिशा मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया।

प्रारंभिक उपचार के बाद भी बच्ची की हालत में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने सांस की नली में रुकावट की आशंका में लैरिंगोस्कोपी की। जांच में सांस की नली में सुपारी का टुकड़ा फंसा मिला। इसके बाद ईएनटी विशेषज्ञों ने रिजिड ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से सुपारी को सुरक्षित बाहर निकाल दिया। उपचार के बाद बच्ची सामान्य रूप से भोजन करने लगी और सक्रिय हो गई।

इसी तरह ग्यारसपुर तहसील के सेमरा गांव निवासी दो वर्षीय सत्यम लोधी को 23 अगस्त को मूंगफली खाने के बाद सांस लेने में परेशानी हुई। परिजन उसे पहले निजी क्लीनिक ले गए, लेकिन नेब्युलाइजेशन से राहत नहीं मिली। इसके बाद जिला अस्पताल में जांच के दौरान उसके फेफड़े के दाहिने हिस्से में हवा का प्रवेश पूरी तरह बंद पाया गया। बच्चे को तत्काल मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू में भर्ती कर ऑक्सीजन, एंटीबायोटिक और नेब्युलाइजेशन दिया गया।

25 अगस्त को ईएनटी ऑपरेशन थिएटर में रिजिड ब्रोंकोस्कोपी कर सांस की नली में फंसी मूंगफली बाहर निकाली गई। इसके बाद बच्चे को कुछ दिन पीआईसीयू, एचडीयू और वार्ड में निगरानी में रखा गया। स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

दोनों बच्चों का उपचार मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग की टीम ने किया। उपचार करने वाली टीम में डॉ. शिव कुमार रघुवंशी, डॉ. आदित्य गार्गव, डॉ. प्रियंका वर्मा और डॉ. शोभित यादव शामिल रहे।

चिकित्सकों ने अभिभावकों को छोटे बच्चों को सुपारी, मूंगफली, मेवे या अन्य छोटे खाद्य पदार्थ देते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि ऐसी वस्तुएं सांस की नली में फंसने पर कुछ ही समय में गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए।

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