मुंबई , मई 04 -- महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बारामती उपचुनाव में 2.14 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल कर अपने दिवंगत पति और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के 2019 के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। उन्होंने यह चुनावी जीत अपने दिवंगत पति और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को समर्पित की हैं।

उन्हें 2,18,930 वोट मिले, जबकि उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे 22 विरोधी उम्मीदवारों को 'नोटा' के साथ कुल मिलाकर 4,837 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।

इससे पहले दिन में जब बारामती उपचुनाव के नतीजों की नौवें दौर की गिनती के बाद भी श्रीमती सुनेत्रा पवार ने अपने विरोधियों पर 78,528 से अधिक वोटों की बढ़त बना ली थी, तो यह साफ हो गया था कि श्री अजीत पवार द्वारा स्थापित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की विधायक की जीत पक्की है क्योंकि विरोधियों पर उनकी बढ़त लगातार बढ़ती जा रही थी।

उन्होंने बारामती से अपनी चुनावी जीत अपने दिवंगत पति और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को समर्पित की, जिनका 28 जनवरी को एक दुखद विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। उन्होंने इसके लिए बारामती की जनता का भी आभार व्यक्त किया क्योंकि अब वह महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक के तौर पर इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

श्रीमती पवार ने सोशल मीडिया पर लिखा, " अपने वोटों के माध्यम से हम सभी ने जो विश्वास दिखाया है, उसे मैं आदरणीय अजीत दादा की पावन स्मृति को समर्पित करती हूं। आज जब चुनाव के नतीजे घोषित हो रहे हैं, तो हम सभी भावुक हैं। अजीत दादा से दिल से प्यार करने वाले सभी कार्यकर्ताओं से मेरा विनम्र अनुरोध है कि इस जीत का जश्न मनाने के लिए कोई भी जुलूस न निकाले और न ही फूलों की वर्षा करे। आइए हम संयम बनाए रखें और दादा के विचारों के अनुरूप ही आचरण करें।"श्रीमती पवार ने लिखा, ''मैं बारामती की समस्त जनता का तहे दिल से आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने मुझे अजीत दादा के सपनों का बारामती बनाने का अवसर प्रदान किया। यह अंत नहीं बल्कि एक दृढ़ संकल्प, संघर्ष और एक नए बारामती की बस शुरुआत है।"गौरतलब है कि यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई थी कि बारामती उपचुनाव निर्विरोध हो लेकिन 22 विरोधी उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस नहीं लिया, जिसके कारण मतदान करवाना पड़ा। कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे के नाम वापस लेने के बाद चुनावी मैदान में श्रीमती सुनेत्रा पवार सहित 23 उम्मीदवार रह गए थे।

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