चंडीगढ़ , अक्टूबर 16 -- पंजाब सरकार के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने सुखना आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि का रामसर दर्जा मिलने पर चंडीगढ़ प्रशासन को बधाई देते हुए इस मान्यता के बारे में आम लोगों को सरल भाषा में जानकारी देने का आग्रह किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां 'रामसर' शब्द का संबंध ईरान के उस शहर से है, जहां 1971 में अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि सम्मेलन अपनाया गया था। इसका अमृतसर के ऐतिहासिक रामसर सरोवर से कोई संबंध नहीं है और सुखना झील का नाम भी नहीं बदला है।
श्री सिद्धू ने शुक्रवार को पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक को भेजे अर्ध-सरकारी पत्र में कहा कि सुखना आर्द्रभूमि को मिली यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता उसके पारिस्थितिक महत्व की स्वीकारोक्ति है और झील के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को नए सिरे से मजबूत करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के विशेषज्ञ 'रामसर स्थल' शब्द से परिचित हैं, लेकिन आम लोगों के लिए इसका अर्थ स्पष्ट करना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि सभी प्रचार सामग्री में 'सुखना आर्द्रभूमि, चंडीगढ़' नाम प्रमुखता से रखा जाए। साथ ही सरकारी वेबसाइटों, सूचना पटों और अन्य प्रचार सामग्री पर अंग्रेजी, हिंदी और पंजाबी में संक्षिप्त स्पष्टीकरण दिया जाए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विशेषज्ञों की सलाह और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत सुखना झील को यूनेस्को के किसी उपयुक्त ढांचे के अंतर्गत अतिरिक्त मान्यता दिलाने की संभावना का आकलन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई भी प्रयास तथ्यों और विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित होना चाहिए तथा पहले से यह नहीं मान लेना चाहिए कि झील इसके लिए पात्र है। उन्होंने कहा कि रामसर दर्जा अपने आप में यूनेस्को की विश्व धरोहर का दर्जा नहीं है।
झील के संरक्षण पर जोर देते हुए श्री सिद्धू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता का वास्तविक महत्व पानी की गुणवत्ता, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और झील के जलग्रहण क्षेत्र की दीर्घकालिक सुरक्षा में है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 18 जनवरी, 2017 की अधिसूचना के माध्यम से चंडीगढ़ की ओर सुखना वन्यजीव अभयारण्य के आसपास पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया था। उन्होंने कहा कि अभयारण्य का बड़ा हिस्सा और झील का जलग्रहण क्षेत्र पंजाब तथा हरियाणा में आता है। इसलिए चंडीगढ़ प्रशासन को दोनों राज्य सरकारों के साथ सहयोगात्मक तरीके से संरक्षण संबंधी कदम उठाने चाहिए, ताकि झील का स्वच्छ जल सुरक्षित रहे और आसपास के भूमि मालिकों के आजीविका तथा कृषि संबंधी अधिकार भी प्रभावित न हों।
श्री सिद्धू ने कहा कि सुखना झील ने दुनिया की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों के मानचित्र पर अपना स्थान बनाया है और चंडीगढ़का प्रत्येक निवासी इस उपलब्धि पर गर्व कर सकता है। उन्होंने कहा कि तीन भाषाओं में एक पंक्ति का स्पष्टीकरण देने से जनता को इस सम्मान का सही अर्थ समझने में मदद मिलेगी।उन्होंने कहा कि इस मान्यता की असली कसौटी यह होगी कि10 साल बाद सुखना झील के पानी, पक्षियों और जलग्रहण क्षेत्र का संरक्षण आज की तुलना में कितना बेहतर हुआ है।
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