शिमला , अगस्त 04 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार राज्य के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार के दृष्टिकोण एवं नीतियों को हकीकत में बदलने के लिए लगातार कोशिशें कर रही है। इसके लिए कई विकास पहलें की जा रही हैं जिनका उद्देश्य एक समृद्ध एवं आत्मनिर्भर राज्य बनाना है।

विधानसभा परिसर में डॉ. परमार की 120वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के निर्माता के आदर्शों को पूरी तरह से और सही भावना के साथ अपनाना ही उनकी विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार ने अपनी दृढ़ प्रयासों एवं दूरदर्शी नेतृत्व के जरिए हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

श्री सुक्खू ने कहा कि मौजूदा सरकार डॉ. परमार के शिक्षित, समृद्ध और अच्छी तरह से जुड़े हुए हिमाचल के दृष्टिकोण के अनुरूप नीतियां अपना रही है। उन्होंने कहा कि राज्य ने 99.30 प्रतिशत साक्षरता दर प्राप्त कर ली है और पूरी तरह से साक्षर राज्य बन गया है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए 156 सरकारी स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जोड़ा गया जबकि हर विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी सरकारी मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना भी शुरू की है जिसके तहत उच्च शिक्षा को और सुलभ बनाने के लिए 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण एक प्रतिशत ब्याज पर दिया जा रहा है।

डॉ. परमार के ग्रामीण विकास पर ध्यान का उल्लेख करते हुए श्री सुक्खू ने कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती, स्वरोज़गार और स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत कर रही है। उन्होंने कहा कि गांवों से शहरी इलाकों की ओर पलायन को रोकने के लिए गांवों का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सड़क संपर्क और जरूरी अवसंरचना में सुधार शामिल है।

राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक सहमति बनाने का आह्वान करते हुए, मुख्यमंत्री ने सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों से आग्रह किया कि वे हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम करें और 2032 तक राज्य को देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक बनाने में योगदान दें।

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने हिमाचल प्रदेश के गठन और विकास में डॉ. परमार के योगदान को अभूतपूर्व बताया, वहीं विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य की खास पहचान के लिए पूर्व मुख्यमंत्री का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।उन्होंने सड़क संपर्क और संतुलित क्षेत्रीय विकास पर डॉ. परमार के ध्यान का भी उल्लेख किया। पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्रीनिवास जोशी ने डॉ. परमार के जीवन और योगदान पर मुख्य भाषण दिया।

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