शिमला , मार्च 21 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को पेश किए गए राज्य बजट में महिलाओं के लिए स्टाम्प ड्यूटी में कमी की घोषणा करने के साथ ही ज़मीन के मालिकाना हक के दस्तावेजीकरण को आसान बनाने पर भी ज़ोर दिया ।

सरकार ने महिलाओं में सम्पति मालिकाना हक को बढ़ावा देने के मकसद से उनके नाम पर ज़मीन के पंजीकरण पर स्टाम्प ड्यूटी में चार प्रतिशत की कमी की है। यह छूट अब एक करोड़ रुपये तक की सम्पति के लेन-देन पर लागू होगी। यह पहले 80 लाख रुपये थी। इस बदलाव के साथ, महिलाओं को पहले के आठ प्रतिशत के मुकाबले चार प्रतिशत की रियायती स्टाम्प ड्यूटी दर देनी होगी। इस कदम से महिलाओं में ज़्यादा सम्पति मालिकाना हक को बढ़ावा मिलने और उनकी वित्तीय सुरक्षा मज़बूत होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने ज़मीन मालिकों को मालिकाना हक या 'संपत्ति कार्ड' जारी करने की भी घोषणा की, जिससे यह पक्का हो सके कि लोगों को अब ज़मीन के मालिकाना हक को सत्यापन करने के लिए मुश्किल सरकारी प्रक्रिया से नहीं गुज़रना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ज़मीन के रिकॉर्ड समय पर देने और ज़मीन के झगड़ों को तेज़ी से सुलझाने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

श्री सुक्खू ने राजस्व प्रशासन में सुधारों पर ज़ोर देते हुए कहा कि ज़मीन का नामांतरण अब पंजीकरण के साथ ही किया जाएगा, जिससे सालों तक चलने वाली देरी खत्म हो जाएगी। लंबित नामातंरण मामलों को जल्दी निपटाने के लिए एक पायलट पहल भी शुरू की जाएगी। राज्य सरकार ने प्रणाली को मज़बूत करने के लिए ज़मीन के रिकॉर्ड को बनाए रखने और राजस्व सेवा देने में कुशलता बढ़ाने के लिए पहले ही 623 पटवारियों की भर्ती शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा कि मालिकाना हक कार्ड जारी होने से सम्पति के लेन-देन में काफी आसानी होने और ज़मीन के मालिकों को बैंक रिण आसानी से मिलने की उम्मीद है, क्योंकि सत्यापित ज़मीन के रिकॉर्ड से प्रक्रिया में देरी और झगड़े कम होंगे। सरकार ने आपदा से प्रभावित परिवारों को घर फिर से बनाने के लिए आठ लाख रुपये की वित्तीय मदद के साथ ही ग्रामीण आजीविका के कामों के लिए प्रोत्साहन राशि और कौशल विकास कार्यक्रम की घोषणा की। इससे पहले इसे चार लाख रुपये से बढ़ाकर साढ़े सात लाख रुपये कर दिया गया था।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित