सुकमा , मार्च 31 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान के तहत बड़ी सफलता मिली है, जहां कुल 16 लाख रुपये के ईनामी दो माओवादी कैडर ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले दोनों कैडर लंबे समय से सक्रिय हैं और केकेबीएन डिवीजन (ओडिशा) में कार्यरत रहे हैं। जिससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि सुकमा क्षेत्र के माओवादी पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी सक्रिय नेटवर्क बनाए हुए थे।
जिले की पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने मंगलवार को बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में जनिला उर्फ मड़काम हिंडमे (30) और सोनी उर्फ माड़वी कोसी (24) शामिल हैं। दोनों कंपनी नंबर 08 के पार्टी सदस्य थे और प्रत्येक पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों ने रक्षित आरक्षी केंद्र सुकमा में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आत्मसमर्पण किया।
दोनों आत्मसमर्पित माओवादी सुकमा जिले के किस्टाराम थाना क्षेत्र के निवासी हैं। जनिला उर्फ मड़काम हिंडमे ग्राम एलगुंडा का रहने वाली है, जबकि सोनी उर्फ माड़वी कोसी ग्राम गोरगुंडा का निवासी है। दोनों का संबंध छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से है, जबकि उनकी सक्रियता ओडिशा के केकेबीएन डिवीजन क्षेत्र में दर्ज की गई थी, जो सीमावर्ती इलाकों में माओवादी नेटवर्क की गतिविधियों को दर्शाता है।
अधिकारियों ने बताया कि केकेबीएन डिवीजन में सक्रियता इस बात का संकेत है कि माओवादी संगठन सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे थे लेकिन सुकमा में सुरक्षाबलों के लगातार दबाव और प्रभावी रणनीति के चलते अब उनका नेटवर्क कमजोर पड़ा है और कैडर आत्मसमर्पण के लिए आगे आ रहे हैं।
आत्मसमर्पण के बाद मिली खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने विशेष तलाश अभियान चलाया, जिसके दौरान जंगलों में छिपाकर रखा गया भारी मात्रा में हथियार और नकदी का भंडार बरामद किया गया। बरामद सामग्री में 10 लाख रुपये नगद, एक इंसास एलएमजी राइफल, दो एके-47 राइफल, तीन 303 राइफल, एके-47 के 14 राउंड और 303 के 13 राउंड शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि लगातार चलाए जा रहे अभियान और तलाश अभियान के कारण माओवादी अपने हथियार और संसाधन छोड़कर पीछे हटने को मजबूर हो रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से प्राप्त इनपुट इस कार्रवाई में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं।
जिला पुलिस सुकमा द्वारा "छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति" के तहत "पूना मार्गेम" अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके प्रभाव से माओवादी कैडर हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, सुरक्षा और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक चव्हाण ने बताया कि जिले में माओवादी संगठन तेजी से कमजोर हुआ है और विकास कार्यों के विस्तार से दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की योजनाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 'नक्सल मुक्त बस्तर' संकल्प की समय-सीमा का अंतिम दिन है और इस दिशा में यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण कदम है।
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