सुकमा , अक्टूबर 29 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को उनकी मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में नई पहल की गई है। इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में गोंडी और हल्बी जैसी स्थानीय बोलियों के माध्यम से बच्चों को कहानियों, गीतों और कविताओं के जरिए शिक्षा दी जाएगी।

जिला मुख्यालय स्थित डीपीआरसी भवन में गुरुवार को कलेक्टर अमित कुमार ने प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) से संबंधित विशेष पाठ्यक्रम की प्रथम और द्वितीय इकाई की पुस्तकों का विमोचन किया। इन पुस्तकों को मोबाइल क्रैचेज, दिल्ली की प्रारंभिक बाल विकास विशेषज्ञ टीम ने तैयार किया है।

महिला एवं बाल विकास विभाग और मोबाइल क्रैचेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना तथा उनके मानसिक, बौद्धिक और भाषाई विकास को प्रोत्साहित करना है।

जिला प्रशासन के अनुसार, कुल छह इकाइयों में तैयार पाठ्यक्रम को स्थानीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश के अनुरूप विकसित किया गया है। इसमें गोंडी और हल्बी भाषाओं में कहानियों, गीतों तथा कविताओं को शामिल किया गया है, ताकि बच्चे अपनी परिचित भाषा में खेल-खेल के माध्यम से आसानी से सीख सकें।

इसी क्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए 26 से 31 अक्टूबर तक छह दिवसीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इसमें दोरनापाल और कोंटा सहित जिले की विभिन्न परियोजनाओं की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पाठ्यक्रम की तीसरी और चौथी इकाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शेष इकाइयों का प्रशिक्षण आगामी चरणों में प्रदान किया जाएगा।

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