सुकमा , मई 16 -- ) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन मॉडल और सुकमा जिला प्रशासन की सक्रिय पहल के चलते सुकमा जिले में स्वास्थ्य और जनकल्याण सेवाओं की एक नयी और सकारात्मक तस्वीर सामने आ रही है। एक ओर जहां आयुष चिकित्सा पद्धति से लंबे समय से बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राहत मिल रही है। वहीं दूसरी ओर सुशासन शिविरों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंच रहा है। सुकमा निवासी 39 वर्षीय सीमा सिंह पिछले पांच वर्षों से गंभीर माइग्रेन से परेशान थीं। इलाज के लिए उन्होंने कई बड़े शहरों का रुख किया और विभिन्न एलोपैथिक उपचार भी अपनाए, लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिली।
बीते चार मई को जब वे सुकमा स्थित 'आयुष स्पेशलिटी क्लिनिक' पहुंचीं, तो अनुभवी चिकित्सक डॉ. मनोरंजन पात्रो की देखरेख में उन्हें आयुर्वेदिक उपचार दिया गया। लगभग एक सप्ताह तक चले पंचकर्म उपचार, विशेषकर 'शिरोधारा' पद्धति के बाद उनके पुराने माइग्रेन में उल्लेखनीय राहत मिली।
इलाज के बाद सीमा सिंह ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें दर्द से मुक्ति मिली है और यह अनुभव उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया है। उन्होंने जिला प्रशासन और चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया। जिला प्रशासन के प्रयासों से आयुष चिकित्सालय की सुविधाओं में सुधार हुआ है। अब यह अस्पताल सप्ताह में छह दिन नियमित रूप से संचालित हो रहा है, जहां प्रतिदिन औसतन 14 से 15 मरीज उपचार प्राप्त कर रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों तक पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को सुलभ बनाना है।
दूसरी ओर, जिले में आयोजित सुशासन शिविरों ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को तेज और पारदर्शी बना दिया है। गादीरास में आयोजित शिविर के दौरान सोनाकुकानार गांव से पहुंचे नन्हे इंदुनाथ का आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर उन्हें सौंप दिया गया। वहीं देवी चौक सुकमा में श्रीमती नेहा नाग को श्रम कार्ड तत्काल जारी किया गया। स्थानीय लोगों ने इस त्वरित सेवा पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अब सरकारी योजनाओं के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है।
जिला प्रशासन ने सामाजिक पुनर्वास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आत्मसमर्पित युवाओं को आयुष चिकित्सालय में रोजगार देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। इससे न केवल उन्हें आर्थिक संबल मिला है बल्कि क्षेत्र में सकारात्मक संदेश भी गया है।
सुकमा में आयुष चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुशासन शिविरों की संयुक्त पहल यह संकेत दे रही है कि मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी जनकल्याण और विकास की नई कहानी लिखी जा सकती है।
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