बिलासपुर , फरवरी 28 -- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कोल इंडिया की प्रमुख अनुषंगी इकाई एसईसीएल की मेजबानी में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय चिकित्सा सम्मेलन सीमेकॉन 2026 का शुभारंभ शनिवार को प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशालाओं एवं वैज्ञानिक सत्रों के साथ हो गया। 'हेल्दी माइन्स, हेल्दी इंडिया' की विषयवस्तु पर आधारित इस सम्मेलन का उद्घाटन एसईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने किया।
एसईसीएल के पीआरओ से आज (शनिवार) मिली जानकारी के अनुसार,उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बिरंची दास ने कहा कि स्वस्थ खदान की अवधारणा केवल एक थीम नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक स्वस्थ और सक्षम कार्यबल ही उद्योग की सबसे बड़ी पूंजी है। इसके लिए खदान क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर रोगों का निदान और उन्नत चिकित्सा पद्धतियों का प्रभावी उपयोग आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
इस अवसर पर एसईसीएल के चिकित्सा सेवा प्रमुख डॉ. श्रुतिदेव मिश्रा, सोहागपुर क्षेत्र के चिकित्सा सेवा प्रमुख डॉ. कल्याण सरकार, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरिहंत जैन सहित कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों और देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों से आए वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।
सम्मेलन के पहले दिन दो महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में व्यावसायिक स्वास्थ्य (ऑक्यूपेशनल हेल्थ) पर केंद्रित कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें स्पाइरोमेट्री, चेस्ट एक्स-रे, आईएलओ रेडियोग्राफ्स एवं न्यूमोकोनियोसिस (कोयला खनिकों में होने वाला फेफड़ों का रोग) जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। द्वितीय सत्र में इस्केमिक हृदय रोग में ईसीजी की भूमिका पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें हृदय रोगों के शीघ्र निदान में इसके महत्व को रेखांकित किया गया।
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