पंतनगर , अक्टूबर 09 -- उत्तराखंड के पंतनगर में मानव तस्करी पर रोकथाम के लिए शुक्रवार को अहम बैठक हुई और अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई के लिए राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के मध्य समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया गया।

पंतनगर विश्वविद्यालय के गांधी हॉल ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन में कहा गया कि केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराधियों के नेटवर्क, उनकी कार्यप्रणाली और नए तौर-तरीकों की पहचान कर उनके विरुद्ध समन्वित कार्रवाई जरूरी है।

इसके लिए राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच समन्वय, सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान, संदिग्ध गतिविधियों की समय पर पहचान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क के खिलाफ निरंतर समन्वय और सहयोग विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

गृह मंत्रालय, केन्द्र सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में आयोजित इस सम्मेलन में उत्तराखंड के साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, केंद्रीय एजेंसियां, सरकारी विभाग, अभियोजन अधिकारी, गैर-सरकारी संगठन और बाल कल्याण समितियों के कुल 134 प्रतिनिधि शामिल हुए।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) वी. मुरुगेशन ने कहा कि मानव तस्करी संगठित और गंभीर अपराध है, जिससे निपटने के लिए केवल पुलिस नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष बल दिया।

सम्मेलन में पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया। कार्रवाई के साथ पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण, संरक्षण तथा कानूनी और सामाजिक सहायता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया गया। बच्चों और संवेदनशील वर्गों की समय पर पहचान, सुरक्षित बचाव, बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुति और पुनर्वास प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई।

सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक पी.एम. नायर, एसडब्ल्यूआरसी बनबसा के जनक बहादुर चंद, मदद फाउंडेशन के राजेश मणि, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के रविकांत, संयुक्त निदेशक (विधि) जी.सी. पंचोली और सहायक अभियोजन अधिकारी अपर्णा अवस्थी सहित विशेषज्ञों ने आधुनिक विवेचना तकनीकों, साक्ष्य आधारित अन्वेषण, प्रभावी अभियोजन और बचाव के बाद संरक्षण व पुनर्वास को मजबूत करने के संबंध में सुझाव दिए। साथ ही पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल और विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

सम्मेलन में हरिद्वार जिले से जुड़े दो मामले साझा किए गए। एक में 13 वर्षीय अपहृत बालिका को बिहार से सकुशल बरामद कर पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। दूसरे में अपहृत चार माह के शिशु को सुरक्षित बरामद किया गया। इन मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, त्वरित जांच और अंतरराज्यीय समन्वय की अहम भूमिका रही।

सम्मेलन में आईजी प्रशिक्षण अनंत शंकर ताकवाले, आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, डीआईजी (अपराध एवं कानून व्यवस्था) धीरेंद्र गुंज्याल, एसएसपी ऊधमसिंहनगर अजय गणपति, चार जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक और सभी जनपदों की मानव तस्करी निरोधक इकाई (एएचटीयू) के नोडल अधिकारी व प्रभारी मौजूद रहे। समापन सत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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