जम्मू , अप्रैल 01 -- जम्मू - कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को सीमा से सटे गांवों को "भारत की पहली रक्षा पंक्ति" बताते हुए कहा कि इन गांवों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के दूसरे चरण के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में माखवाल गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र के निवासी साहस, त्याग और धैर्य के प्रतीक हैं और उनकी सेवा केवल शब्दों में नहीं, बल्कि उनके जीवन स्तर में सुधार के रूप में दिखनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "सीमा के गांव देश के अंतिम नहीं, बल्कि पहले गांव हैं। यहां रहने वाले लोग हर पल देश की रक्षा में खड़े रहते हैं।" उपराज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी परिवार की जरूरत अनदेखी न हो और जहां योजनाएं कम पड़ें, वहां तुरंत समाधान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि माखवाल और अन्य सीमा गांवों का विकास उनके लिए "भावना, संकल्प और जिम्मेदारी" का विषय है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के वादों और जमीनी स्तर पर मिलने वाले लाभों के बीच कोई अंतर नहीं होना चाहिए। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सीमा गांवों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। श्री सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सीमा क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जम्मू जिले के सभी 541 सीमा गांवों को समान ऊर्जा और दृष्टि के साथ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने हर सीमा गांव के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने और मासिक प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए।

उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर सीमा गांव में बेहतर सड़कें, पूर्ण रूप से कार्यरत स्कूल और युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि "हम चाहते हैं कि माखवाल का हर बच्चा देश के किसी बड़े शहर के बच्चे की तरह शिक्षा प्राप्त करे और हर किसान को बेहतर बीज, सिंचाई और बाजार की सुविधा मिले।"युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सीमा गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत केवल सही दिशा देने की है। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों और उद्यमिता को बढ़ावा देने की भी बात कही।

उपराज्यपाल ने बताया कि 2019 से पहले सीमा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार गरीबी रेखा से नीचे थे, लेकिन पिछले पिछले पांच से छह वर्षों में कई परिवार गरीबी से बाहर आए हैं। सड़क, बिजली और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार लगभग सभी गांवों तक किया गया है।

उन्होंने कहा कि कृषि, डेयरी, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने से स्थानीय आय में वृद्धि हुई है और शहरों की ओर पलायन में कमी आई है। कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल ने माखवाल में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र, सिंथेटिक वॉलीबॉल और बैडमिंटन कोर्ट, सामुदायिक भवन, स्वास्थ्य उपकेंद्र और पशु चिकित्सा केंद्र शामिल हैं।

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