पटना , अप्रैल 22 -- राज्य के सुदूर, सीमावर्ती एवं बाढ़-प्रभावित जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों को निर्बाध बारहमासी सड़क संपर्कता प्रदान करने के संकल्प के साथ ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है।

विशेष रूप से सीमांचल एवं पूर्वी बिहार जैसे भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में इस योजना के माध्यम से पक्की ग्रामीण सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि सीमांचल के चुनौतीपूर्ण जिलों में इस योजना का सबसे व्यापक प्रभाव हुआ है। इस दिशा में अररिया जिले में सर्वाधिक 2155 किलोमीटर, पूर्णिया में 1747 किलोमीटर, कटिहार में 1565 किलोमीटर और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे किशनगंज में 883 किलोमीटर पक्की ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया जा चुका है।

इन बारहमासी ग्रामीण सड़कों के निर्माण से सीमांचल और पूर्वी बिहार के ग्रामीण अंचलों में दशकों पुरानी आवागमन संबंधी चुनौतियों का स्थायी समाधान सुनिश्चित हुआ है। ग्रामीण सड़कों के व्यापक जाल से बाढ़ एवं जलजमाव की स्थिति में भी गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से निर्बाध बना रहता है, जिससे सुदूर गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं की सुगम पहुँच सुनिश्चित हुई है। इस सुदृढ़ संपर्कता का सकारात्मक प्रभाव क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। मखाना, जूट एवं अनानास जैसे कृषि उत्पादों के उत्पादक किसानों को इससे सुविधा हो रही है, जिससे उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को भी गति मिली है।

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