बैतूल , जून 12 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में भूमि सीमांकन कार्य संसाधनों की कमी के कारण प्रभावित हो रहा है। जिले के 532 पटवारी हल्कों और 10 तहसीलों के लिए राजस्व विभाग के पास केवल एक रोवर मशीन उपलब्ध होने से सीमांकन प्रकरणों के निराकरण की गति धीमी पड़ गई है और बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं।

राजस्व विभाग के अनुसार भूमि सीमांकन से संबंधित आवेदन सबसे अधिक प्राप्त होते हैं। जमीन के स्वामित्व, निर्माण कार्य, नामांतरण तथा अन्य राजस्व प्रक्रियाओं के लिए सीमांकन आवश्यक होने के कारण इसकी मांग लगातार बनी रहती है। जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में भी बड़ी संख्या में शिकायतें सीमांकन में विलंब से संबंधित प्राप्त होती हैं।

जिले में कुल 532 पटवारी हल्के हैं, जबकि वर्तमान में 477 पटवारी ही पदस्थ हैं। कई हल्कों में नियमित पटवारी उपलब्ध नहीं हैं। वहीं सीमांकन के लिए आवश्यक रोवर मशीन की संख्या मात्र एक होने से समस्या और गंभीर हो गई है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती ढाई महीनों में सीमांकन के 5650 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 3471 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है, जबकि 2179 मामले अभी भी लंबित हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिस गति से आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, उसके अनुरूप सीमांकन कार्य नहीं हो पा रहा है।

भूमि मामलों के जानकारों का कहना है कि जिले की प्रत्येक तहसील में कम से कम एक रोवर मशीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में एक मशीन से पूरे जिले की आवश्यकताओं की पूर्ति करना कठिन है। सीमांकन में देरी के कारण किसानों, भू-स्वामियों और अन्य आवेदकों के अनेक कार्य प्रभावित होते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।

रोवर मशीनों की कमी के बीच कुछ निजी एजेंसियां सीमांकन सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन इनकी लागत अपेक्षाकृत अधिक बताई जाती है। निजी माध्यम से सीमांकन कराने पर एक से दो हजार रुपये प्रति एकड़ तक शुल्क लिया जा रहा है।

इस बीच राजस्व विभाग ने सीमांकन प्रक्रिया में तेजी लाने की दिशा में पहल करते हुए 20 पटवारियों को रोवर मशीन संचालन का प्रशिक्षण दिया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से आने वाले समय में सीमांकन कार्यों के निष्पादन में सुधार होगा।

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